राम मंदिर चंदा विवाद। (फोटो एआई जेनरेटेड)
बेकार में हंगामा मचा रखा है। राम मंदिर में लूट हो गई, लूट हो गई। दिमाग़ ख़राब हो रखा है सबका। पागलों का देश है ये। आसमान सिर पर उठाकर रखा हुआ है।
कह रहे हैं जाँच करवाओ, पता लगाओ, कौन खा गया, कौन डकार गया। पकड़ो, जेल भेजो, निकलवाओ सब चढ़ावा।
अरे क्या लूट हो गई....बताइए ज़रा...? क्या घरवाले कभी घर में लूट करते हैं? राम मंदिर हमारा अपना घर है। हम घर के रखवाले हैं। कोई ज़रूरत थी तो कुछ धन ले लिया। इसमें इतना हो-हल्ला मचाने की क्या ज़रूरत है।
एक बात बताइए। घर में किसी को डायबिटीज़ हो। आप उसे मीठा खाने से मना करते हों और अगर वह चोरी से दो गुलाब जामुन खा जाए तो आप क्या करेंगे? उसे चोर करार देंगे, जांच बैठाएंगे, मोहल्ले में ढिंढोरा पीटेंगे, कोर्ट-कचहरी करेंगे? नहीं करेंगे न? बस यही बात राम मंदिर में हुई है तो आप लगे हो छाती पीटने।
और भगवान राम को तो कोई आपत्ति नहीं है। अगर होती तो रोक देते तुरंत, ज़्यादा कुपित होते तो उठाते धनुष-बाण और कर देते हमारा काम तमाम। क्या आप उनके बल को कम समझते हैं? वे तो सर्वव्यापी हैं। जो सीसीटीवी में नहीं दिख रहा वह भी उनकी निगरानी में हैं। उन्होंने नहीं रोका तो तुम कौन होते हो रोकने वाले। अरे राम के नाम पर आया धन अगर राम भक्तों के काम नहीं आएगा तो किसके काम आएगा?
दान धर्म
दान धर्म के बारे में शास्त्रों में बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि दान वो होता है जिसमें दाएं हाँथ से दो तो बाँए को भी ख़बर नहीं होनी चाहिए। आपने शास्त्रों का अध्ययन तो किया नहीं है। बस लगे अपने दान का ढिंढोरा पीटने। हमने चाँदी की शिलाएं दी थीं, हमने काग भुसुंडी दिए थे, हमने आभूषण दिए थे, हमने पादुकाएं दी थीं।
आपने दान का हिसाब रखा, जिससे पता चलता है कि आपमें दान धर्म का पालन नहीं किया। आपके अंदर दान की भावना ही नहीं थी। आप दान का हिसाब रख रहे थे, इससे घृणित बात कोई हो सकती है भला। आपका दान तो दान ही नहीं था, इसलिए उसके बारे में कोई पूछताछ करना, दानदाता के धर्म का उल्लंघन है, सरासर अधार्मिक है।
और इससे भी पतित विचार और क्या हो सकते हैं कि शिकायत करते फिर रहे हैं कि हमें रसीद नहीं मिली, हमें रसीद नहीं मिली। शर्म नहीं आती भगवान राम के मंदिर से रसीद माँगते?
उन भगवान राम के मंदिर से जिनकी कृपा से ही तुम्हें धन-संपत्ति प्राप्त हुई, तुम इस लायक़ हुए कि दान दे सको? रसीद माँगने के पहले तो डूब मरना चाहिए था तुम लोगों को।
और अब मुँह ही खुलवा दिया है तो ये भी सुन लो। मेहनत की कमाई से सोना-चाँदी इकट्ठा नहीं होता। मेहनत से दो जून की रोटी मिल जाए इस राज में तो यही बहुत है। अस्सी करोड़ लोग पाँच किलो मुफ़्त अनाज पर गुज़र-बसर कर रहे हो। और तुम हो कि काले धन से दिए छोटे से दान पर इतना घमंड कर रहे हो। धिक्कार है तुम पर।
ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स...
अब भुगतना जब ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स छापे मारने आएगी। देते रहना दान की रकम का हिसाब। सारा सच निकलवा लेंगी वे। फिर मांगते रहना रसीद।
ये बताओ, इतने स्वार्थी कैसे हो सकते हो तुम? ख़ुद को सनातनी कहते हो और ये नहीं देखते कि जो लोग राम लला को लाए, जिन्होंने राम का भव्य मंदिर बनवाया, उनका भी कुछ हक़ बनता है कि नहीं चढ़ावे पर। पता नहीं कितने सालों से हम राम लला को लाने की तपस्या कर रहे हैं और तुम हो कि छोटा-मोटा दान देकर भक्त शिरोमणि बनने का दावा ठोंक रहे हो।
और पता नहीं दान के बदले में भगवान राम से क्या-क्या माँगा होगा और भगवान राम ने कौन-कौन सी मन्नतें पूरी की होंगी....उसका कोई हिसाब है तुम्हारे पास। उसकी कोई रसीद दोगे। बोलो-बोलो, चुप क्यों हो गए?
चढ़ावा अर्थव्यवस्था को मज़बूत करेगा
फिर राम का चढ़ावा कोई विदेश तो चला नहीं गया। स्विस बैंक में तो जमा नहीं हो गया। गया भी होगा तो किसी रामभक्त के अकाउंट में ही जमा होगा। कुल मिलाकर धन है तो इसी देश का। भगवान राम के देश का। अडानी ले या अंबानी, चढ़ावा तो इस देश की अर्थव्यवस्था को ही मज़बूत करेगा। चढ़ावे में हिस्सेदारी के इस सात्विक और सार्थक प्रयोजन को क्यों नहीं समझते आप?
अरे सातवें नरक में भी जगह नहीं मिलेगी कृतघ्नों, एहसान फ़रामोशों। भूल गए कि राम की जन्मभूमि में राम का मंदिर ही नहीं था। हमने बाबरी मस्जिद तोड़ी, जाने कितने झूठ बोले, कितने दंगे-फसाद कराए, उत्पात मचाया, नफ़रत फैलाई, न्यायपालिका तक के हाथ मरोड़े, तब जाकर तुम्हारा सपना साकार हुआ। अब जब सपना पूरा हो गया है तो कहते हो चढ़ावे का हिसाब दो। आँखों की शरम भी कोई चीज़ होती है कि नहीं?
सचमुच में कलयुग आ गया है। इस तरह का विचार मन में लाना भी महापाप होता है और तुम लोग हो कि निर्लज्जता के साथ कह रहे हो, बताओ कहाँ गया दान, कहाँ गया चढ़ावा?
अरे पापियों, ये राम द्रोह है राम द्रोह। राम की लीला जानी नहीं और लगे राम भक्तों पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाने। इस सकल ब्रम्हांड में जो कुछ हो रहा है वह बिना राम की आज्ञा से हो सकता है? तुलसी बाबा की चौपाई भूल गए क्या- भला होंइहै वही जो राम रचि राखा। तुमने जो चढ़ावा दिया था उसमें भी राम की मर्ज़ी थी, हमने चढ़ावा लिया तो वह भी राम के आशीर्वाद से हुआ। इसमें पुलिस, कोर्ट-कचहरी का क्या रोल?
अच्छा चलो जाओ हम नहीं देते हिसाब। जो करना है कर लो.....क्या कर लोगे....पुलिस हमारी, प्रशासन हमारा, अदालतें हमारी....वे हम रामभक्तों के साथ हैं.....तुम्हारी एक नहीं सुनेंगी, उल्टे यूएपीए में अंदर कर देंगी तो जेल में बैठकर उम्र भर करते रहना राम भजन।
सीधी से बात समझ में नहीं आती कि राम मंदिर असल में राम का खेत है और हम राम की चिड़िया। राम की चिड़िया राम का खेत, चुग ले चिड़िया भर-भर पेट। हमें पूरा अधिकार है कि हम खेत में दाने चुगते रहें।
ये हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और तुम क्या कोई भी ये हमसे नहीं छीन सकता। हमारा पेट अभी नहीं भरा है। हम सैकड़ों साल से चुगते आए हैं। आगे भी चुगते रहेंगे। आज तक हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाया तो तुम क्या उखाड़ लोगे।