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तब्लीग़ी जमात को पश्चाताप नहीं, कहा- साज़िशन बदनाम किया जा रहा है! 

तब्लीग़ी जमात के प्रमुख मौलाना साद ने कहा है कि वह अभी सेल्फ़ क्वरेंटाइन में हैं और जब 14 दिन पूरे हो जाएँगे तो वह दिल्ली पुलिस के नोटिस का जवाब देंगे। ऐसा शनिवार को एक बयान जारी कर कहा गया है। इसके साथ ही उन्होंने यह मान लिया है कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें नोटिस देने के साथ ही कई सवाल पूछे हैं। ये सवाल तब्लीग़ी जमात के मरकज़ में हुए कार्यक्रम को लेकर हैं जिसमें शामिल हुए बड़ी संख्या में लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। जमात की ओर से कहा गया है कि मरकज़ के खुलने के बाद सभी सवालों के जवाब दिए जाएँगे। 

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हाल ही में दिल्ली की क्राइम ब्रांच ने जमात के आयोजक मौलाना साद के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज किया है। माना जाता है कि क़रीब एक हफ़्ते यानी एफ़आईआर दर्ज होने के पहले से ही मौलाना साद नहीं देखे गए हैं। यह वह समय था जब मरकज़ में शामिल हुए कई लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि होने लगी थी। इससे पहले भी मौलाना साद ने एक ऑडियो जारी कर बताया था कि वह आइसोलेशन में हैं। उन्होंने अपने समर्थकों से सरकारी आदेश का पालन कर भीड़ इकट्ठा नहीं करने की अपील की थी।

बाद में क्राइम ब्रांच ने नोटिस देकर लापरवाही बरतने पर कई सवाल पूछे। क्राइम ब्रांच की ओर से भेजे गए नोटिस में संगठन का पूरा पता और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारियाँ माँगी गई हैं। इसके अलावा संगठन से जुड़े कर्मचारियों की पूरी डिटेल, जिसमें घर का पता और मोबाइल नंबर भी शामिल हो, मरकज़ के मैनेजमेंट से जुड़े लोगों की डिटेल भी माँगी गई है। साथ ही पूछा गया कि ये लोग कब से मरकज़ से जुड़े रहे हैं।

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इसके जवाब में शनिवार को मौलाना साद के बेटे और जमात कमिटी के सदस्य मुहम्मद यूसुफ़ ने एक लिखित में बयान जारी किया है। यूसुफ़ के अनुसार यह बयान मौलाना साद की सलाह पर तैयार किया गया है।

बयान में कहा गया है, '31 मार्च के बाद से जमात मुख्यालय के बारे में मीडिया की रिपोर्टें केवल साज़िश का हिस्सा हैं और मर्कज़ को बदनाम करने की कोशिश है। तब्लीग़ी जमात का किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।' मौलाना साद के हवाले से बयान में कहा गया है कि यह सिर्फ़ इत्तिफ़ाक़ है कि तब्लीग़ी जमात के मुख्यालय में लोग कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि जैसे ही उन्हें कोरोना पॉजिटिव केस के बारे में पता चला उन्होंने मुख्यालय में लोगों के आने पर पाबंदी लगा दी थी।

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