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पतंजलि पर 10 लाख का जुर्माना; कोरोना के डर का फ़ायदा उठाकर कमा रही मुनाफ़ा: कोर्ट

कोरोनिल नाम की दवा से कोरोना का इलाज करने का दावा कर रहे योग गुरू रामदेव को तगड़ा झटका लगा है। मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी कंपनी पतंजलि आयुर्वेद पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।  

मद्रास हाई कोर्ट में चेन्नई की अरुद्रा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से याचिका दायर की गई थी। कंपनी की ओर से कहा गया था कि कोरोनिल 92बी नाम से उनका ट्रेडमार्क प्रोडक्ट रजिस्टर्ड है और वह लगभग तीन दशक से औद्योगिक रसायन की सफाई के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है। तब हाई कोर्ट ने कोरोनिल शब्द के इस्तेमाल पर स्टे लगा दिया था और पतंजलि इस नाम से दवा नहीं बना सकी थी। गुरूवार को हुई सुनवाई में अदालत ने पतंजलि द्वारा कोरोनिल शब्द का इस्तेमाल करने पर लगे स्टे को हटाने की मांग को भी खारिज कर दिया। 

जस्टिस सीवी कार्तिकेय ने अपने 104 पेज के आदेश में कहा, ‘पतंजलि और दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट ने इस बात को कई बार प्रोजेक्ट किया कि वह 10 हज़ार करोड़ रुपये की कंपनी है, लेकिन इसके बाद भी वे मुनाफ़ा कमाने के लिए लोगों के बीच कोरोना को लेकर फैले डर और परेशानी को हथियार बना रहे हैं।’ 

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अदालत ने कहा कि वे आम लोगों के बीच कोरोना के इलाज का दावा कर रहे हैं जबकि सच्चाई यह है कि उनकी कोरोनिल टैबलेट कोरोना वायरस का कोई इलाज नहीं है बल्कि यह खांसी, बुखार और सर्दी के लिए एक इम्यूनिटी बूस्टर है। 

अदालत ने कहा, ‘यह आसानी से पता किया जा सकता है कि कोरोनिल एक रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क है। अगर कंपनी ने यह पता किया और फिर भी वे धृष्टता के साथ इस नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं तो फिर उनकी बात सुनने का कोई कारण नहीं है।’ 

अदालत ने कहा कि पतंजलि अदयार कैंसर इंस्टीट्यूट और नैचुरोपैथी मेडिकल कॉलेज को 5-5 लाख रुपये दे। ये दोनों ही संस्थान मरीज़ों की निशुल्क सेवा कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि यह पैसा 21 अगस्त से पहले दे दिया जाना चाहिए। 

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5 अगस्त को ही स्वामी रामदेव ने इस बात का दावा किया कि कोरोनिल के हर दिन 10 लाख पैक की मांग आ रही है और हम केवल 1 लाख पैक की ही आपूर्ति करने में सक्षम हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर मद्रास हाई कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद से कहा था कि वह कोरोनिल शब्द का इस्तेमाल न करे तो रामदेव इसे कोरोनिल कहकर क्यों बुला रहे हैं और पतंजलि इसे किस नाम से बाज़ार में बेच रही है। बाज़ार में पूछने पर यह बताया गया है कि काफी समय से कोरोनिल की दवा नहीं आ रही है। 

अब पतंजलि के पास यही विकल्प है कि वह सुप्रीम कोर्ट में चेन्नई हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दे या फिर वह अपनी दवा को नए नाम से बाज़ार में लांच करे। 

लांचिंग के बाद से ही विवाद

रामदेव और उनके सहयोगी बालकृष्ण ने जून के अंत में कोरोनिल से कोरोना वायरस के संक्रमण के इलाज का दावा किया था। रामदेव ने कहा था पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट और निम्स, जयपुर ने इसे मिलकर तैयार किया है। उन्होंने यह भी कहा था कि दवा के क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल के लिए क्लीनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री- इंडिया (सीटीआरआई) की मंजूरी ली गई थी। लेकिन केंद्र सरकार ने उसी दिन पतंजलि से कहा था कि वह कोरोनिल का प्रचार तब तक रोक दे जब तक शोध में इस दवा से इलाज के दावे का सत्यापन नहीं हो जाता। 

इसके बाद रामदेव, बालकृष्ण, वैज्ञानिक अनुराग वार्ष्णेय, एनआईएमएस के अध्यक्ष बलबीर सिंह तोमर और निदेशक अनुराग तोमर के ख़िलाफ़ जयपुर के ज्योति नगर थाने में एफ़आईआर दर्ज कराई गई थी। 

आयुष मंत्रालय के टास्कफ़ोर्स ने भी साफ़ शब्दों में कहा था कि पतंजलि इस दवा को 'कोविड-19 के इलाज' की दवा कह कर नहीं बेच सकता है।

उत्तराखंड सरकार के एक लाइसेंसिंग अधिकारी ने भी कहा था कि रामदेव ने उत्तराखंड सरकार से यह कहकर लाइसेंस लिया था कि यह दवा खांसी-बुखार ठीक करेगी और इम्यूनिटी को बढ़ाएगी। रामदेव का पतंजलि संस्थान उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित है। 

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