Tamil Nadu Chief Minister Vijay ने गठबंधन दलों के कड़े विरोध के मद्देनजर ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल को ओएसडी के पद से 24 घंटे के अंदर हटा दिया। सीपीएम, सीपीआई, कांग्रेस ने इस नियुक्ति पर आपत्ति की थी। विश्वासमत हासिल करने के बाद इसकी घोषणा की गई। विजय ने बुधवार को विधानसभा में 144 वोट प्राप्त किए। एआईएडीएमके से अलग हुए कुछ विधायकों में से 24 ने विजय की सरकार का समर्थन किया। कुछ तटस्थ रहे। डीएमके ने सत्र का बहिष्कार कर दिया।
TVK सरकार के सहयोगी दलों और विपक्षी दलों की तीखी आलोचना के बाद सीएम विजय को यह कदम उठाना पड़ा। रिकी पंडित को मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD बनाए जाने की खबर सामने आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था।
VCK  विधायक वाणी अरसु ने विधानसभा फ्लोर टेस्ट से पहले ही कहा कि सरकार को वैज्ञानिक और तर्कसंगत सोच पर जोर देना चाहिए, अंधविश्वास पर नहीं। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार को वैज्ञानिक सोच को महत्व देना चाहिए, ज्योतिष को नहीं।” इसी तरह CPI (M) और CPI के नेताओं ने भी इसकी निन्दा की है। CPI (M) के राज्य सचिव पी. षणमुगम ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना है। उन्होंने तर्क दिया कि सार्वजनिक धन से ज्योतिषी को सरकारी पद देना अंधविश्वास को बढ़ावा देगा। CPI के राज्य सचिव एम. वीरापांडियन ने भी इसी तरह की चिंता जताई।
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DMDK की नेता प्रेमलता विजयकांत ने सीएम विजय पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कदम युवाओं के लिए गलत उदाहरण है, जिन्होंने बड़े पैमाने पर TVK को वोट दिया। उन्होंने कहा, “रिकी पंडित को OSD बनाया गया, मैं पूरे तमिलनाडु की जनता की ओर से इसकी निंदा करती हूं। अगर वे आपके गुरु हैं तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से रखें। युवाओं ने आपको वोट दिया है। आप युवाओं और भविष्य के लिए क्या उदाहरण पेश कर रहे हैं? क्या संदेश दे रहे हैं?”

विवाद बढ़ने के बाद सीएम विजय ने संकेत दिया था कि नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाएगा। फ्लोर टेस्ट के तुरंत बाद उन्होंने कहा कि कई राजनीतिक दलों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर विचार किया जा रहा है। इसके कुछ ही देर बाद रिकी पंडित की OSD नियुक्ति रद्द कर दी गई।

तमिलनाडु में यह नई घटना नहीं

यह घटना पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता द्वारा ज्योतिषियों पर भरोसा करने की पुरानी खबरों को भी फिर से चर्चा में ला गई है। एमजी रामचंद्रन भी ज्योतिषियों पर काफी भरोसा करते थे। नियुक्ति रद्द होने के फैसले से TVK सरकार पर पड़ रहे दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली है। पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के समय में चंद्रास्वामी का काफी बोलबाला रहा था।