अनबिल महेश पर आरोप है कि स्कूल शिक्षा मंत्री (2021-26) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्थायी मान्यता और अन्य प्रशासनिक मंजूरियां देने के बदले में 1000 से अधिक निजी स्कूल प्रबंधन से 'पार्टी फंड' के नाम पर पैसे वसूले।
अनबिल महेश पोय्यामोझी और एमके स्टालिन
तमिलनाडु के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री और डीएमके के वरिष्ठ नेता अनबिल महेश पोय्यामोझी को सोमवार को चेन्नई में गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी मद्रास हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। पुलिस के अनुसार, वे क़रीब 100 करोड़ रुपये के निजी स्कूल घोटाले से जुड़े हैं।
ग्रेटर चेन्नई पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच यानी सीसीबी ने उन्हें गिरफ्तार किया। मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत में पुलिस ने कहा था कि जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिल चुके हैं और हिरासत में पूछताछ ज़रूरी है। अनबिल महेश को इस मामले में पांचवें आरोपी के रूप में नामजद किया गया है। वे विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के करीबी माने जाते हैं और डीएमके के दूसरे पीढ़ी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं।
अनबिल महेश पर क्या है आरोप?
पुलिस का आरोप है कि अनबिल महेश 2021 से 2026 तक स्कूल शिक्षा मंत्री रहने के दौरान निजी स्कूलों को स्थायी मान्यता, स्कूल अपग्रेड, भवन मंजूरी और अन्य प्रशासनिक अनुमतियां दिलाने के बदले पैसे वसूलते थे। यह पैसा ‘पार्टी फंड’ के नाम पर लिया जाता था। सीसीबी के मुताबिक़ बी.टी. अरासकुमार नाम के व्यक्ति के नेतृत्व वाली एक अपंजीकृत एसोसिएशन निजी स्कूल प्रबंधनों से पैसे इकट्ठा करती थी। मंत्री के कार्यकाल में इस एसोसिएशन ने स्थायी मान्यता और अन्य मंजूरियों का वादा कर पैसा लिया। जांच में अब तक 177 स्कूल प्रबंधन सामने आए हैं और करीब 17.26 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता चला है। कुल घोटाले की रकम 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है। कुछ रिपोर्टों में 1000 से ज्यादा स्कूलों का ज़िक्र भी है।
पुलिस का कहना है कि अनबिल महेश ने 2024 में अपने निजी सहायक के ज़रिए इस एसोसिएशन को स्थापित करने में मदद की और दिसंबर में चेन्नई में एक कार्यक्रम में इसके आयोजकों का सार्वजनिक रूप से परिचय भी करवाया। स्कूलों से इकट्ठा किया गया पैसा मंत्री को ‘पार्टी फंड’ बताकर सौंपा जाता था।
मामला कैसे शुरू हुआ?
यह मामला तमिलनाडु प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव इलंगोवन उर्फ टी.सी. एलंगोवन की शिकायत पर शुरू हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.टी. अरासकुमार और अन्य पदाधिकारियों ने स्थायी मान्यता, अपग्रेडेशन, नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट, लाइसेंस और अन्य मंजूरियां दिलाने का वादा कर स्कूलों से सदस्यता शुल्क और पैसा लिया, लेकिन वादा पूरा नहीं किया। जून 2026 में अरासकुमार और दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
पिछले माह हुई थी छापेमारी
सीसीबी ने सितंबर में अनबिल महेश के चेन्नई और तिरुचिरापल्ली स्थित घरों तथा परिसरों पर आठ घंटे तक छापेमारी की। इस दौरान संपत्ति के दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट, 18 मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट समेत 118 सामान जब्त किए गए। अनबिल महेश सितंबर में पूछताछ के लिए सीसीबी के सामने पेश भी हुए थे। पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत धाराएं जोड़ी हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने भी मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत मामला दर्ज कर वित्तीय लेन-देन की जाँच शुरू की है। राजनीतिक बदले की कार्रवाई: डीएमके
अनबिल महेश ने आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने छापेमारी को राजनीतिक बदला बताया था। डीएमके का आरोप है कि सत्तारूढ़ टीवीके सरकार राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। अनबिल महेश ने पहले कहा था कि वे पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और डर या अपराधबोध नहीं है। उन्होंने एफआईआर रद्द करने के लिए भी अदालत का रुख किया है। अभी जांच जारी है। पुलिस हिरासत में पूछताछ करेगी। इस मामले में आगे क्या होता है, यह देखने वाली बात होगी।कौन हैं अनबिल महेश पोय्यामोझी?
अनबिल महेश पोय्यामोझी तमिलनाडु की राजनीति में DMK के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह पार्टी की दूसरी पीढ़ी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। उन्होंने 2021 से 2026 के बीच तमिलनाडु के स्कूल शिक्षा मंत्री के रूप में काम किया। उनकी गिरफ्तारी तब हुई है जब राज्य में राजनीतिक दलों के बीच जांच एजेंसियों की कार्रवाई और राजनीतिक बदले के आरोपों को लेकर टकराव जारी है।
DMK ने आरोप लगाया है कि TVK सरकार राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि कार्रवाई निजी स्कूलों से कथित तौर पर पैसे वसूलने की शिकायतों और जांच के दौरान सामने आई सामग्री के आधार पर की गई है।
मद्रास हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बाद अनबिल महेश को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस इस मामले में कथित वित्तीय लेनदेन, स्कूल प्रबंधन से वसूली गई रकम और आरोपियों के बीच संबंधों की जांच कर रही है। लेकिन गिरफ्तारी का अर्थ आरोप साबित होना नहीं है। मामले में पुलिस और ED की जांच के नतीजे तथा अदालत की आगे की कार्यवाही ही यह स्पष्ट करेगी कि निजी स्कूलों से कथित वसूली के आरोपों में कितनी सच्चाई है और किसकी क्या भूमिका रही।