तेलंगाना के निकाय चुनावों में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की, जबकि बीआरएस और बीजेपी को क़रारा झटका लगा। कांग्रेस के लिए इस चुनाव नतीजे के क्या मायने हैं?
तेलंगाना में 11 फरवरी को हुए नगर निकाय चुनावों के नतीजे कांग्रेस के लिए बेहद अच्छे रहे हैं। इन नतीजों से मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सरकार को बड़ा समर्थन मिला है। 116 नगर पालिकाओं और 7 नगर निगमों में चुनाव हुए और कांग्रेस ने ज्यादातर जगहों पर जीत हासिल की, जबकि मुख्य विपक्षी भारत राष्ट्र समिति यानी बीआरएस और बीजेपी को बड़ा झटका लगा।
मतगणना के आँकड़ों के अनुसार, कांग्रेस 116 नगर पालिकाओं में से 64 से 70 तक पर कब्जा जमाती दिख रही है। बीआरएस को 13-15 नगर पालिकाएं मिलती दिख रही हैं। कई जगहों पर कोई भी पार्टी बहुमत नहीं पाती दिख रही है और इन जगहों पर हंग असेंबली जैसी स्थिति बनी है। अब कांग्रेस और बीआरएस दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने साथ मिलाने की कोशिश कर रहे हैं।
नगर निगमों में कांग्रेस ने 4 जगहों- मंचेरियाल, रामागुंडम, नलगोंडा और महबूबनगर पर बढ़त बनाई। कोठागुडेम में सीपीआई आगे रही, जबकि करीमनगर और निजामाबाद में बीजेपी मजबूत दिखी। बीआरएस किसी भी नगर निगम में आगे नहीं रही।
तेलंगाना राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, कुल 2,866 वार्डों में से जहां नतीजे आए, वहां कांग्रेस ने 1499 वार्ड जीते। बीआरएस को 765 वार्ड मिले, जबकि बीजेपी 285 वार्डों पर जीती। एआईएमआईएम ने 58 वार्ड जीते और सीपीआई(एम) को 13 वार्ड मिले।
कांग्रेस के लिए क्यों बड़ी जीत?
ये चुनाव कांग्रेस सरकार के लिए एक तरह का 'मिनी रेफरेंडम' थे, क्योंकि पार्टी दिसंबर 2023 में विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता में आई थी। अब दो साल से ज्यादा हो गए हैं।
रेवंत रेड्डी ने खुद चुनाव प्रचार की कमान संभाली। उन्होंने और उनके मंत्रियों ने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, हैदराबाद के विकास और शहरों में कामों को मुख्य मुद्दा बनाया।
कांग्रेस नेताओं ने बीआरएस के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव यानी केसीआर के परिवार पर हमला किया। द इंडियन एक्सप्रेस ने कांग्रेस के सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है, 'हमने जनता को केसीआर की अनुपस्थिति का संदेश अच्छे से पहुंचाया।' टीपीसीसी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने कहा, 'शहरी इलाकों ने भी कांग्रेस का साथ दिया। रेवंत सरकार के विकास एजेंडे से लोग खुश हैं। राज्य में कांग्रेस से मुकाबला करने वाला कोई नहीं बचा।'
गांधी भवन में जश्न मना रहे कांग्रेस कार्यकर्ता के बीच से एक नेता ने कहा, 'हम 80 निकायों की जीत की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन हमने इससे ज्यादा कर दिखाया।'
बीआरएस और बीजेपी का क्या हाल?
बीआरएस ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी और कई सीटों पर बहुत कम अंतर से हारे। बीआरएस वर्किंग प्रेसिडेंट के.टी. रामा राव यानी केटीआर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हम कांग्रेस के ख़िलाफ़ मुख्य विपक्ष बने रहे, बीजेपी बहुत पीछे रह गई।'
बीजेपी को तीसरे नंबर पर धकेल दिया गया। राज्य बीजेपी अध्यक्ष रामचंदर राव ने कहा, 'नतीजों से हम खुश नहीं हैं, लेकिन हमने कांग्रेस-बीआरएस चुनाव में सेंध लगाई। लगता है कि कांग्रेस, बीआरएस, एआईएमआईएम और वाम दल मिलकर बीजेपी को हराने में लगे थे।'
रेवंत रेड्डी सरकार के लिए मायने
ये नतीजे रेवंत रेड्डी सरकार के लिए बड़ा मनोबल बढ़ाने वाले हैं। अब जल्द ही हैदराबाद के नए तीन हिस्सों- ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, मलकाजगिरी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और साइबराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में चुनाव होने हैं। इनमें कुल 300 वार्ड होंगे। महेश गौड़ ने दावा किया, 'कांग्रेस मेगा ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में भी साफ़ जीत हासिल करेगी।'ये चुनाव दिखाते हैं कि तेलंगाना में कांग्रेस की शहरी इलाक़ों में पकड़ मज़बूत हो गई है। बीआरएस का प्रभाव कम हुआ और बीजेपी अभी भी संघर्ष कर रही है। जनता ने सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को पसंद किया। अब देखना है कि आने वाले महीनों में राजनीति कैसे आगे बढ़ती है।