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तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर।

बेरोज़गारी की मार के बीच तेलंगाना में 48 हज़ार कर्मचारी बर्खास्त

एक ओर देश में जहां इसे लेकर चिंता है कि बेरोज़गारी की दर 45 साल में सबसे ज़्यादा हो गई है, वहीं दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने हज़ारों लोगों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीएसआरटीसी) के कर्मचारी रविवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। लेकिन मुख्यमंत्री केसीआर ने तुगलक़ी फ़रमान जारी करते हुए 48 हजार से ज़्यादा कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। 

परिवहन निगम के 50 हज़ार कर्मचारी शुक्रवार रात से ही हड़ताल पर हैं। इन कर्मचारियों की 26 मांगें हैं। इनकी मांग है कि परिवहन निगम का सरकार में विलय कर दिया जाए जिससे वे सरकारी कर्मचारी बन जाएं और उन्हें वे लाभ मिल सकें जिसके वे हकदार हैं। कर्मचारियों ने शनिवार शाम को हड़ताल ख़त्म करने से मना कर दिया था। 

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हड़ताल के दौरान राज्य भर में बसें नहीं चल रही हैं और त्यौहार के मौसम में इससे हज़ारों लोग प्रभावित हुए हैं। राज्य सरकार ने लोगों को परेशानी न हो इसके लिए 2500 बसों को किराये पर लिया है। तेलंगाना हाई कोर्ट की अवकाश प्राप्त बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार से 10 अक्टूबर तक वैकल्पिक रास्ता बताने के लिए कहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री को आंध्र प्रदेश की ही तरह राज्य परिवहन निगम का सरकार में विलय कर देना चाहिए। 
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मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग और अनुशासनहीनता के सामने नहीं झुकेगी। बताया जाता है कि राज्य परिवहन निगम में अब केवल 1200 कर्मचारी बचे हैं और तुरंत ही रिक्रूटमेंट की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है लेकिन नए भर्ती किये गये लोगों को सरकार से इस बात का वादा करना होगा कि वे किसी भी तरह की यूनियन में शामिल नहीं होंगे। 

इसे लेकर राज्य में राजनीति भी तेज हो गई है। बीजेपी ने कहा है कि मुख्यमंत्री के इस बेतुके फ़ैसले ने कर्मचारियों को सड़क पर ला दिया है। बीजेपी ने कहा है कि मुद्दे को सुलझाने के बजाय मुख्यमंत्री ने तुगलक़ी फ़ैसला लिया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि उनके इस फ़ैसले से राज्य के हालात ख़राब हो सकते हैं। 

एक ओर देश में अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर लगातार झटका देने वाली ख़बरें आ रही हैं, खपत और माँग में लगातार कमी हो रही है, उत्पादन तेज़ी से गिर रहा है, बेरोज़गारी 45 साल के शिखर पर है, वहां एक झटके में हज़ारों कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त किये जाने के फ़ैसले को क़तई सही नहीं ठहराया जा सकता। 
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