अयोध्या में नाबालिग से हुए सामूहिक रेप केस में अदालत ने समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान को बरी कर दिया है। पूरा फैसला 30 जनवरी को आएगा। लेकिन याद कीजिए मात्र आरोप लगने पर सपा नेता की बेकरी पर बुलडोज़र चला दिया गया था।
अयोध्या की वो बेकरी जिसे रेप का आरोप लगने पर गिरा दिया गया था
अयोध्या (फैज़ाबाद) जिले में 12 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में विशेष पीओसीएसओ अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। समाजवादी पार्टी के नेता मोइद खान (71 वर्ष) को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है, जबकि उनके कर्मचारी राजू खान को दोषी ठहराया गया है। राजू खान की सजा का ऐलान 29 जनवरी को होने वाला है। इस घटना के सामने आने के बाद सरकार ने सपा नेता मोइद खान की बेकरी को गिरा दिया था। पीड़िता की मां को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलवाया गया था। पूरे मामले को हिन्दू-मुसलमान रंग बीजेपी नेताओं ने देने की कोशिश की लेकिन अयोध्या के लोग बहकावे में नहीं आए।
विशेष न्यायाधीश (पीओसीएसओ एक्ट) निरूपमा विक्रम की अदालत ने यह फैसला सुनाया। मामले की जांच के दौरान किए गए डीएनए परीक्षण में मोइद खान का डीएनए नमूना गर्भपात कराए गए भ्रूण से मेल नहीं खाया, जबकि राजू खान का डीएनए मैच पाया गया। इसी आधार पर अदालत ने मोइद खान को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
यह मामला जुलाई 2024 का है। पीड़िता की मां ने 29 जुलाई 2024 को पुराकलंदर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी 12 साल की बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया, उसे धमकियां दी गईं और पीओसीएसओ एक्ट के तहत अपराध किए गए। घटना पुरा कलंदर क्षेत्र के भदरसा में करीब दो महीने पहले हुई बताई गई। शिकायत के आधार पर 30 जुलाई 2024 को मोइद खान और राजू खान को गिरफ्तार किया गया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान, सरकारी पक्ष ने नाबालिग लड़की, उसकी मां, मेडिकल करने वाले डॉक्टर और जांच अधिकारी सहित 14 गवाहों से पूछताछ की। बचाव पक्ष ने मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों पर भरोसा किया। फैसले में फोरेंसिक विश्लेषण एक महत्वपूर्ण कारण था। जांच के दौरान दोनों आरोपियों के डीएनए नमूनों का परीक्षण किया गया।
पीड़ित लड़की मोइद खान के घर में दिहाड़ी पर काम करती थी। मामले के सामने आने पर मोइद खान की बेकरी और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को अतिक्रमण के आरोप में ध्वस्त कर दिया गया था, जिससे राजनीतिक विवाद भी खड़ा हुआ था। मोइद खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से जमानत मिली थी।
सरकारी अधिवक्ताओं विनोद उपाध्याय और रोहित पांडे ने कहा है कि वे मोइद खान की बरी होने के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत ने डीएनए नतीजों पर 'अनुचित जोर' दिया, जबकि पीड़िता की गवाही और अन्य परिस्थितिजन्य एवं डॉक्टरी सबूतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। सरकारी पक्ष ने कहा कि वे फैसले का विस्तार से अध्ययन कर रहे हैं और जल्द ही अपील दायर करेंगे।
यह मामला राज्य में काफी चर्चा में रहा था और अब राज्य सरकार द्वारा मोइद खान के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की संभावना है। राजू खान के खिलाफ पीओसीएसओ एक्ट और संबंधित आईपीसी धाराओं के तहत दोषसिद्धि हुई है, जबकि मोइद खान को सबूत नाकाफी होने के कारण छूट मिली।