2027 के यूपी विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी की तैयारी के तौर पर आज यानी शुक्रवार को होने वाली बैठक से पहले राज्य कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया है। महिला पहलवानों के उत्पीड़न मामले में बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह समिति में शामिल किए गए हैं।
महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में बरी होने के क़रीब तीन महीने बाद ही बृजभूषण शरण सिंह को उत्तर प्रदेश बीजेपी की राज्य कार्यकारिणी समिति में शामिल कर लिया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद अब यह पार्टी में उनकी बढ़ती राजनीतिक भूमिका का संकेत माना जा रहा है। हालाँकि, बृजभूषण को बरी किए जाने के फैसले को चार महिला पहलवानों ने चुनौती दी है और दिल्ली की एक अदालत ने 28 अक्टूबर को उन्हें इस अपील पर जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बीजेपी ने अपनी राज्य कार्यकारिणी समिति का गठन किया है। इस समिति में पूर्व बीजेपी सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को भी जगह दी गई है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 26 अक्टूबर को नई राज्य कार्यकारिणी का गठन किया। शुक्रवार को लखनऊ में पार्टी की एक दिवसीय बैठक होनी है, जिसमें 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति और रोडमैप तैयार किया जाएगा।
बैठक के उद्घाटन सत्र को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संबोधित करेंगे, जबकि समापन सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन होगा। इस अहम बैठक से पहले बृजभूषण को राज्य कार्यकारिणी में शामिल किए जाने को पार्टी के भीतर उनकी भूमिका के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
बृजभूषण पहली बार कार्यकारिणी में शामिल
बृजभूषण शरण सिंह पूर्व सांसद होने के साथ-साथ पूर्व WFI अध्यक्ष भी रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनका प्रभाव खास तौर पर गोंडा और आसपास के पूर्वांचल के इलाकों में माना जाता है। द इंडियन एक्सप्रेस ने बीजेपी के एक नेता के हवाले से रिपोर्ट दी है कि बृजभूषण चार दशक से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय हैं और छह बार सांसद रह चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें पहली बार उत्तर प्रदेश बीजेपी की राज्य कार्यकारिणी समिति में शामिल किया गया है। अंग्रेज़ी अख़बार ने पार्टी से जुड़े सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि इससे पहले बृजभूषण को न तो बीजेपी की राष्ट्रीय इकाई में और न ही प्रदेश इकाई में कोई प्रमुख संगठनात्मक पद दिया गया था।नई समिति में बृजभूषण के अलावा गोंडा जिले के छह अन्य बीजेपी नेताओं को भी शामिल किया गया है। इस नियुक्ति से यह सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी अब बृजभूषण को संगठन में अधिक सक्रिय भूमिका देने के लिए तैयार है।
महिला पहलवानों के आरोपों के बाद नहीं मिला था टिकट
बृजभूषण शरण सिंह को 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने टिकट नहीं दिया था। उस समय महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर देशभर में विवाद हुआ था और पहलवानों ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन भी किया था। बीजेपी ने कैसरगंज लोकसभा सीट से बृजभूषण के छोटे बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया। कैसरगंज उन सीटों में शामिल है, जिनका बृजभूषण पहले प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। बृजभूषण ने उस चुनाव में कैसरगंज के बाहर प्रचार नहीं किया था। उन्होंने अपने क्षेत्र में मतदाताओं से कहा था कि वह संकट में हैं और करण की जीत उन लोगों के मुंह पर तमाचा होगी, जो उनका राजनीतिक करियर खत्म करना चाहते हैं। करण भूषण सिंह ने अपना पहला लोकसभा चुनाव जीत लिया। अब माना जा रहा है कि भविष्य में बृजभूषण 2029 के लोकसभा चुनाव में खुद टिकट मांग सकते हैं और पार्टी भी उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाने या अन्य क्षेत्रों में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी देने पर विचार कर सकती है।
यौन उत्पीड़न केस में बरी हुए, लेकिन अपील अभी बाकी
बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ छह महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया और कुश्ती महासंघ तथा खेल प्रशासन को लेकर भी सवाल उठे। दिल्ली की एक निचली अदालत ने 3 अगस्त को बृजभूषण को इस मामले में बरी कर दिया था। यह फैसला आरोप लगाए जाने के तीन साल से अधिक समय बाद आया।लेकिन इस फैसले के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। चार महिला पहलवानों ने बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। 28 अक्टूबर को दिल्ली की एक अदालत ने बृजभूषण को इस अपील पर जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि मामले से जुड़ी सभी कानूनी कार्यवाही समाप्त हो गई है। फिलहाल निचली अदालत का बरी करने का फैसला चुनौती के अधीन है।
बीजेपी ने आरोपों को बताया था ‘राजनीतिक साजिश’
उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने बृजभूषण के खिलाफ लगाए गए आरोपों को राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है। त्रिपाठी ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी ने दोषी ठहराए जा चुके और जेल में बंद आजम खान को महासचिव और स्टार प्रचारक बनाया था।उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मुलाकात का भी उल्लेख किया और कहा कि लालू यादव एक मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं। अंग्रेज़ी अख़बार ने रिपोर्ट दी है कि बृजभूषण शरण सिंह से इस संबंध में प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन वह उपलब्ध नहीं थे। उनके प्रतिनिधि सोनू सिंह ने बताया कि पूर्व सांसद पंजाब की यात्रा पर हैं।
2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी का संकेत?
बृजभूषण शरण सिंह उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं में गिने जाते हैं। वह छह बार सांसद रह चुके हैं- पांच बार बीजेपी के टिकट पर और एक बार समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में। उनका राजनीतिक प्रभाव गोंडा और कैसरगंज के आसपास के क्षेत्रों में माना जाता है। ऐसे में राज्य कार्यकारिणी में उनकी नियुक्ति को केवल संगठनात्मक फेरबदल के रूप में नहीं देखा जा रहा।हालाँकि, अभी यह साफ़ नहीं है कि बीजेपी उन्हें 2029 के लोकसभा चुनाव में टिकट देगी या नहीं। राज्य कार्यकारिणी में शामिल किए जाने से इस संभावना पर चर्चा जरूर तेज हुई है, लेकिन इसे आगामी टिकट का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी।
यूपी बीजेपी की नई कार्यकारिणी चार गुना बड़ी
बृजभूषण की नियुक्ति के साथ-साथ नई राज्य कार्यकारिणी का आकार भी चर्चा में है। उत्तर प्रदेश बीजेपी की पिछली राज्य कार्यकारिणी में 184 सदस्य थे। नई कार्यकारिणी में कुल 712 सदस्य शामिल किए गए हैं। इनमें 134 विशेष आमंत्रित सदस्य और 30 स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं। इस तरह समिति का आकार पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है। इतनी बड़ी कार्यकारिणी बनाने को संगठन में अधिक नेताओं और प्रतिनिधियों को जगह देने की कवायद के रूप में देखा जा सकता है।
नई समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। वह वाराणसी से सांसद हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी भी समिति में शामिल हैं। समिति में वाराणसी और गोरखपुर को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व मिला है। वाराणसी प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र है, जबकि गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह क्षेत्र माना जाता है।
2027 के चुनाव के लिए बीजेपी की रणनीति
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले बीजेपी संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटी है। लखनऊ में होने वाली एक दिवसीय बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी पार्टी की चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बैठक से पहले राज्य कार्यकारिणी का गठन भी इसी तैयारी का हिस्सा है। बृजभूषण जैसे क्षेत्रीय प्रभाव रखने वाले नेता को समिति में शामिल करना इस लिहाज से अहम है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में उनकी राजनीतिक पकड़ मानी जाती है।
कुल मिलाकर, बृजभूषण शरण सिंह का उत्तर प्रदेश बीजेपी की राज्य कार्यकारिणी में शामिल होना उनकी राजनीतिक वापसी का संकेत जरूर देता है। लेकिन उनकी भविष्य की चुनावी भूमिका, 2029 में टिकट मिलने की संभावना और लंबित अपील का नतीजा अभी साफ नहीं है।