यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीएसपी प्रमुख मायावती ने EVM से मतदान बंद कर बैलेट पेपर से मतदान की व्यवस्था दोबारा शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने ईवीएम में गड़बड़ी कर उम्मीदवार जिताए। मायावती ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि EVM को लेकर उठ रहे सवालों और संदेहों से लोगों का स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि हर मतदाता को यह भरोसा होना चाहिए कि उसने जिस उम्मीदवार को वोट दिया, वोट उसी के खाते में दर्ज हुआ और उसी की गिनती हुई।

मायावती का बीजेपी पर आरोप

मायावती ने 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी की नगीना सीट से आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की जीत को लेकर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने ईवीएम में कथित हेरफेर कर चंद्रशेखर आजाद को जिताया, ताकि बीएसपी को नुकसान पहुंचाया जा सके।

मायावती ने अपने बयान में चंद्रशेखर आजाद का नाम सीधे लिए बिना कहा कि नगीना की आरक्षित लोकसभा सीट से जीतने वाले आजाद समाज पार्टी के सांसद का वहां कोई मजबूत जनाधार नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएसपी को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से बीजेपी ने ईवीएम में हेरफेर कर उन्हें चुनाव जिताया। मायावती ने कहा कि यह केवल उनका दावा नहीं है, बल्कि नगीना के स्थानीय लोगों के बीच भी ऐसी धारणा है। 
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हालांकि, इस आरोप के समर्थन में मायावती ने कोई सार्वजनिक तकनीकी या स्वतंत्र जांच का प्रमाण पेश नहीं किया। आधिकारिक चुनाव परिणाम के अनुसार चंद्रशेखर आजाद ने नगीना से 5,12,552 वोट हासिल कर बीजेपी के ओम कुमार को 1,51,473 वोटों से हराया था। BSP उम्मीदवार सुरेंद्र पाल सिंह को 13,272 वोट मिले और वह चौथे स्थान पर रहे।

चंद्रशेखर आजाद ने क्या जवाब दिया?

मायावती के आरोप पर चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया और EVM की पारदर्शिता पर सवाल उठाना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन नगीना के मतदाताओं के जनादेश को किसी साजिश से जोड़ना उन्हें स्वीकार नहीं है। आजाद ने यह भी कहा कि वह खुद चुनाव प्रक्रिया में अधिकतम पारदर्शिता और बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग करते रहे हैं। आजाद ने यह भी कहा कि उन्हें खुशी है कि मायावती ने आजाद समाज पार्टी को एक बड़ी राजनीतिक ताकत के तौर पर स्वीकार किया है।

चुनाव पर भरोसा ज़रूरी: मायावती

मायावती ने चुनाव प्रक्रिया की चर्चा करते हुए कहा कि संविधान ने चुनाव कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग को दी है और संसद ने चुनाव को निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए क़ानून और नियम बनाए हैं। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार है। इसके साथ यह भरोसा भी ज़रूरी है कि उसका वोट उसी उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज और गिना जाए।

मायावती ने कहा कि अगर मतदाता को यह संदेह होने लगे कि उसका वोट किसी दूसरे उम्मीदवार के खाते में चला गया या किसी और तरीक़े से गिना गया तो इससे चुनावी व्यवस्था पर लोगों का विश्वास प्रभावित होगा। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि ईवीएम से मतदान तत्काल बंद करके बैलेट पेपर की व्यवस्था वापस लाई जानी चाहिए।

BJP के पुराने EVM विरोध का मुद्दा उठाया

मायावती ने अपने बयान में बीजेपी के पुराने ईवीएम विरोध को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब बीजेपी के नेताओं ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी उस समय ईवीएम में लगी इलेक्ट्रॉनिक चिप को हैक किए जाने की आशंका जताती थी और बैलेट पेपर की व्यवस्था का समर्थन करती थी। मायावती ने यह भी कहा कि बीजेपी के नेताओं ने ईवीएम पर किताब तक प्रकाशित की थी।

बीजेपी के पुराने ईवीएम विरोध का रिकॉर्ड मौजूद है। 2009 में बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने ईवीएम पर ‘Democracy at Risk! Can We Trust Our Electronic Voting Machines?’ नाम की किताब प्रकाशित की थी। बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी उस दौर में ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। मायावती ने इसी पुराने रुख का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि केंद्र में सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने ईवीएम व्यवस्था ख़त्म करने की मांग क्यों नहीं की।

बीएसपी प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी ने शुरुआत से ही ईवीएम आधारित मतदान का विरोध किया है। मायावती ने कहा कि बैलेट पेपर व्यवस्था में मतपत्रों को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोला और गिना जाता था। उनके मुताबिक, भारत में शुरुआती कई दशकों तक इसी व्यवस्था के तहत चुनाव हुए। राज्यसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज है कि मायावती ने मार्च 2017 में ईवीएम के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा था कि बीजेपी जब विपक्ष में थी तब ईवीएम का विरोध करती थी और सत्ता में आने के बाद उसी व्यवस्था का समर्थन कर रही है।

VVPAT को लेकर भी उठाए सवाल

मायावती ने ईवीएम के साथ इस्तेमाल होने वाली VVPAT यानी वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वीवीपैट लगाने के बावजूद सभी वीवीपैट पर्चियों की गिनती नहीं होती, इसलिए मतदाता के भरोसे की समस्या पूरी तरह दूर नहीं होती। यहाँ चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा व्यवस्था को समझना ज़रूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2024 में ईवीएम से दर्ज वोटों और वीवीपैट पर्चियों की 100 फीसदी क्रॉस-वेरिफिकेशन और बैलेट पेपर पर वापस लौटने की मांग को खारिज कर दिया था। अदालत ने मौजूदा EVM-VVPAT व्यवस्था को बरकरार रखते हुए कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के निर्देश दिए थे।

अदालत ने उम्मीदवारों को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत 5 फीसदी ईवीएम के माइक्रोकंट्रोलर की जांच कराने का विकल्प भी दिया था। इसके लिए निर्धारित समयसीमा के भीतर अनुरोध करना होता है।

सभी VVPAT पर्चियों की गिनती क्यों नहीं होती?

मायावती ने वीवीपैट (VVPAT) की पूरी गिनती पर भी बड़ा सवाल उठाया। मौजूदा व्यवस्था में हर ईवीएम की वीवीपैट पर्ची की अनिवार्य रूप से गिनती नहीं होती। चुनाव आयोग के अनुसार, लोकसभा चुनाव में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र या विधानसभा खंड में पांच रैंडम रूप से चुने गए मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों का ईवीएम के कंट्रोल यूनिट के आंकड़ों से मिलान किया जाता है।

इसके अलावा चुनाव प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में ईवीएम और वीवीपैट की जांच होती है। चुनाव आयोग के अनुसार, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में फर्स्ट लेवल चेकिंग, कमीशनिंग और मॉक पोल जैसी प्रक्रियाएँ की जाती हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि उसके ईवीएम में वायरलेस या इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं होती और मशीनों की रैंडमाइजेशन सहित कई प्रशासनिक और तकनीकी सुरक्षा प्रक्रियाएं लागू हैं। आयोग यह भी कहता है कि अब तक जिन रैंडम VVPAT मिलानों का उल्लेख वह करता है, उनमें किसी उम्मीदवार के वोट दूसरे उम्मीदवार को ट्रांसफर होने का मामला सामने नहीं आया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने EVM पर 2024 में क्या कहा था?

अप्रैल 2024 में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने EVM-VVPAT से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला दिया था। याचिकाओं में तीन प्रमुख मांगें थीं- बैलेट पेपर व्यवस्था वापस लाई जाए, वीवीपैट की पर्ची मतदाता को देकर उसे मतपेटी में डालने की व्यवस्था हो और ईवीएम से डाले गए वोटों की सभी वीवीपैट पर्चियों की गिनती की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में कई तकनीकी और प्रशासनिक सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।

2027 के यूपी चुनाव से पहले EVM का मुद्दा क्यों अहम है?

मायावती का ताजा बयान उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले आया है। बीएसपी लंबे समय से ईवीएम को लेकर सवाल उठाती रही है।


मायावती की यह मांग तब आई है जब चुनाव आयोग की मतदाता सूची में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच विवाद चल रहा है। ऐसे में मायावती ने चुनाव प्रक्रिया में मतदाता के भरोसे को अपनी राजनीतिक अपील का एक प्रमुख हिस्सा बनाया है।