रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान से जुड़े इस मामले में यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अटैच किया गया है। ED के मुताबिक, इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन, निर्माण सामग्री और सार्वजनिक संसाधनों का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।
प्रवर्तन निदेशालय ने 28 अक्टूबर 2026 को इस कार्रवाई की जानकारी दी। एजेंसी की जांच के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के निर्माण पर हुए खर्च का बड़ा हिस्सा वैध स्रोतों से साबित नहीं हो सका है। ED ने 426.46 करोड़ रुपये को कथित अपराध से अर्जित आय यानी 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' के तौर पर चिह्नित किया है। हालांकि अभी ये सिर्फ आरोप है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत की गई है।

अखिलेश की मुलाकात के बाद 2027 चुनाव से पहले ही क्यों एक्शन

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 22 अक्टूबर को रामपुर जिला जेल में बंद आजम खान से मुलाकात की थी। करीब एक सप्ताह बाद, 28 अक्टूबर को ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच करने का आदेश जारी किया। अटैच की गई संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये बताया गया है।
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अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया था। जेल में आजम खान से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा था कि उनकी बातचीत केवल रामपुर की राजनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों और पार्टी के चुनावी समीकरणों पर भी चर्चा हुई। अखिलेश ने आजम खान के परिवार के साथ कथित अन्याय का मुद्दा उठाते हुए बीजेपी सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया था। उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर भी सरकार की आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि यूनिवर्सिटी को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
ED की कार्रवाई के बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं। समाजवादी पार्टी और आजम खान के समर्थक पहले भी आरोप लगाते रहे हैं कि बीजेपी सरकार आजम खान और उनके परिवार को राजनीतिक रूप से निशाना बना रही है। अखिलेश यादव की जेल में मुलाकात के बाद यूनिवर्सिटी पर हुई कार्रवाई ने इन आरोपों को फिर चर्चा में ला दिया है। 2027 के चुनाव से पहले यह मामला कानूनी जांच के साथ-साथ एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

आजम खान के ट्रस्ट के अधीन है यूनिवर्सिटी

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के जौहर नगर, सिंहनखेड़ा गांव में स्थित है। यूनिवर्सिटी और उसका परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के स्वामित्व में है। इस ट्रस्ट की स्थापना समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने की थी और ED के मुताबिक, ट्रस्ट का नियंत्रण भी उन्हीं के पास है। आजम खान यूनिवर्सिटी के मानद कुलाधिपति (ऑनरेरी चांसलर) भी हैं। ED ने यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अटैच करने का फैसला उस जांच के आधार पर लिया है, जिसमें सरकारी परियोजनाओं के लिए आवंटित धन और निर्माण सामग्री को कथित तौर पर निजी यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी का कहना है कि ट्रस्ट के पदाधिकारी यूनिवर्सिटी के निर्माण पर खर्च की गई पूरी रकम के वैध स्रोतों का संतोषजनक हिसाब नहीं दे सके।

499 करोड़ रुपये की निर्माण लागत, लेकिन सिर्फ 72.63 करोड़ का हिसाबः ED की जांच में यूनिवर्सिटी के निर्माण पर हुए खर्च को लेकर कई अहम आंकड़े सामने आए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, रामपुर के जिला मूल्यांकन अधिकारी की 10 नवंबर 2023 की रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी परिसर की 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसके अलावा, 114 बिक्री विलेखों (सेल डीड) के जरिए हासिल की गई जमीन का मूल्य 4.63 करोड़ रुपये आंका गया। इस तरह यूनिवर्सिटी परिसर की कुल आकलित लागत 499.09 करोड़ रुपये बताई गई।

ED ने ट्रस्ट के आयकर रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच के बाद दावा किया कि यूनिवर्सिटी के निर्माण और जमीन अधिग्रहण पर खर्च की गई रकम का केवल 72.63 करोड़ रुपये ही वैध स्रोतों से समझाया जा सका। एजेंसी ने 12.29 करोड़ रुपये के उन दान को भी गैर-वास्तविक बताया, जिन्हें ट्रस्ट ने पूंजीगत खर्च के रूप में दर्ज किया था। ED के मुताबिक, शेष 426.46 करोड़ रुपये का स्रोत स्पष्ट नहीं हो सका। इसी रकम को कथित अपराध से अर्जित आय माना गया है। यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ED ने कथित अपराध से अर्जित आय 426.46 करोड़ रुपये बताई है, जबकि अटैच की गई संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये आंका गया है।

सरकारी ठेकों का पैसा जौहर यूनिवर्सिटी में लगाने का आरोप

ED की जांच में आरोप लगाया गया है कि सरकारी परियोजनाओं के लिए जारी धन और निर्माण सामग्री को यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक - सरकारी निर्माण परियोजनाओं के लिए जारी धन को कथित तौर पर यूनिवर्सिटी की ओर मोड़ा गया। सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों से निर्माण सामग्री यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंचाई गई। सरकारी परियोजनाओं से प्राप्त धन का एक हिस्सा कथित तौर पर ट्रस्ट को दान के रूप में वापस भेजा गया। ED ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। 
आजम खान वर्ष 2015 और 2016 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। उस समय उनके पास शहरी विकास विभाग का जिम्मा था। ED के मुताबिक, यूनिवर्सिटी परिसर में किए गए कई निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश जल निगम के जरिए हुए थे। उस समय जल निगम आजम खान के विभाग के अधीन काम करता था।

186 करोड़ रुपये के PWD ठेकों की जांच

ED ने एक ऐसी कंपनी के प्रबंध निदेशक के बयान का हवाला दिया है, जिसे लोक निर्माण विभाग (PWD) से करीब 186 करोड़ रुपये के ठेके मिले थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी के प्रबंध निदेशक ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि ठेके की कुल रकम का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा यूनिवर्सिटी के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किया गया। एक अन्य कंपनी के साझेदारों ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि वे आजम खान के प्रभाव में काम करते थे। ED के मुताबिक, इस कंपनी ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को 40 लाख रुपये का दान दिया था। जांच एजेंसी इन दान और सरकारी ठेकों के बीच कथित संबंधों की जांच कर रही है।

विधायक निधि से भी यूनिवर्सिटी में निर्माण का आरोप

ED ने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में 6.60 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य विधायक और विधान परिषद सदस्य (MLA/MLC) स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से कराए गए। ये कार्य उत्तर प्रदेश जल निगम के जरिए किए गए थे। एजेंसी के मुताबिक, जिस समय ये निर्माण कार्य हुए, उस समय आजम खान उत्तर प्रदेश जल निगम के अध्यक्ष थे। ED का आरोप है कि सार्वजनिक धन का इस्तेमाल एक निजी यूनिवर्सिटी के परिसर में निर्माण के लिए किया गया।

12.16 करोड़ रुपये के पंडाल को लेकर भी सवाल

जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में एक पंडाल के निर्माण को लेकर भी ED ने गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने यूनिवर्सिटी परिसर में पंडाल, ओबीसी छात्रों के छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए कुल 23.41 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। इनमें से पंडाल के निर्माण के लिए वर्ष 2015 में 12.16 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। ED के मुताबिक, मूल सरकारी आदेश में स्पष्ट था कि: पंडाल का स्वामित्व राज्य सरकार के संस्कृति विभाग के पास रहेगा।  पंडाल को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। राज्य सरकार को इस पंडाल का इस्तेमाल मुफ्त में करने की सुविधा मिलेगी। लेकिन जांच एजेंसी का आरोप है कि वर्ष 2016 में जारी एक नए आदेश के जरिए पंडाल का स्वामित्व जौहर यूनिवर्सिटी को हस्तांतरित कर दिया गया। इस नए आदेश में कथित तौर पर राज्य सरकार को मुफ्त इस्तेमाल की सुविधा देने वाली शर्त भी हटा दी गई। ED का कहना है कि इस तरह सार्वजनिक धन से निर्मित एक संपत्ति को निजी यूनिवर्सिटी की संपत्ति में बदल दिया गया।

किसानों की जमीन पर कब्जे के आरोप से शुरू हुई थी जांच

ED ने बताया कि इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच रामपुर के अजीम नगर थाने में दर्ज 26 FIR के आधार पर शुरू की गई थी। इन FIR में आरोप लगाया गया था कि यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा किया गया। जांच एजेंसी ने रामपुर जिला प्रशासन की एक जांच रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, सिंहनखेड़ा गांव में लगभग 34 एकड़ क्षेत्रफल में फैले दुश्मन संपत्ति (Enemy Property) के 45 भूखंडों पर यूनिवर्सिटी के लिए कथित तौर पर अवैध कब्जा किया गया था। ED के मुताबिक, ट्रस्ट को दी गई जमीन की लीज रद्द किए जाने के बावजूद कथित कब्जा जारी रहा। बाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी ने रामपुर जिला प्रशासन के माध्यम से इस जमीन का कब्जा वापस ले लिया। यह जमीन उन संपत्तियों में शामिल है, जिनको लेकर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

आजम खान के खिलाफ 28 अन्य FIR भी जांच के दायरे में

ED ने कहा है कि उसने आजम खान और उनके सहयोगियों के खिलाफ रामपुर पुलिस द्वारा दर्ज 28 अन्य FIR को भी जांच के दायरे में लिया है। इन मामलों में वर्ष 2016 के दौरान रामपुर शहर में कई परिवारों के घरों को कथित तौर पर गिराए जाने के आरोप भी शामिल हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इन मामलों में अधिकांश के संबंध में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। ED ने सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और अन्य अनियमितताओं से जुड़ी जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ साझा की थी। इसके बाद अक्टूबर 2026 में अजीम नगर थाने में आजम खान, ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ एक नई FIR दर्ज की गई। एजेंसी ने कहा है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है।