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नागरिकता क़ानून: डॉ. कफ़ील ख़ान गिरफ़्तार, भड़काऊ भाषण देने का आरोप

ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध बर्दाश्त करने के लिये तैयार नहीं है। उत्तर प्रदेश पुलिस टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़) ने इस क़ानून का विरोध करने वाले डॉ. कफील ख़ान को बुधवार को मुंबई से गिरफ़्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि डॉ. कफ़ील ने नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ अलीगढ़ में भड़काऊ भाषण दिया था। ‘इंडिया टुडे’ के मुताबिक़, शहर पुलिस स्टेशन प्रभारी शशिकांत माने ने कफ़ील को गिरफ़्तार करने की पुष्टि की है। उत्तर प्रदेश पुलिस पर नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के नाम पर ज़्यादतियां करने के ढेरों आरोप लग चुके हैं। 

यूपी एसटीएफ़ के आईजी अमिताभ यश ने ‘इंडिया टुडे’ से कहा कि डॉ. कफ़ील ख़ान ने अलीगढ़ में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में हुई रैली में भड़काऊ भाषण दिया था और इस मामले में अलीगढ़ में दर्ज मुक़दमे में वह वांछित थे। उन्होंने बताया कि डॉ. कफ़ील के ख़िलाफ़ 13 दिसंबर को आईपीसी की धारा 153-ए (धर्म के आधार पर द्वेष फैलाना) के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया था। डॉ. कफ़ील ने यह भाषण 12 दिसंबर को दिया था। 

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डॉ. कफ़ील को गुरुवार को मुंबई बाग़ में चल रहे धरने में शामिल होना था। मुंबई बाग़ में भी दिल्ली के शाहीन बाग़ की तर्ज पर धरना चल रहा है। डॉ. कफील का नाम तब चर्चा में आया था जब 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 60 बच्चों की मौत हो गई थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने लापरवाही बरतने, भ्रष्टाचार में शामिल होने सहित कई आरोप  लगाकर डॉ. कफ़ील को निलंबित कर जेल भेज दिया था। लेकिन बाद में सरकारी रिपोर्ट में ही डॉ. कफ़ील बेदाग़ निकले थे और सरकार ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। 

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नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। दिल्ली में शाहीन बाग़ की तर्ज पर कई जगहों पर धरने पर बैठे लोग इस क़ानून को वापस लेने की मांग को लेकर सड़क पर हैं। 
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