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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे मामला: जानिए, कब क्या हुआ?

एक हफ़्ते तक उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों की पुलिस जिस हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को खोज रही थी, वह मध्य प्रदेश के उज्जैन में पकड़ा गया है। उसने सरेंडर किया है या उसकी गिरफ़्तारी हुई है, इसे लेकर पुलिस जो कहानी बता रही है, उस पर ढेरों सवाल खड़े हो रहे हैं। 

बहरहाल, हम आपको बताते हैं कि 2 जुलाई की रात को कानपुर के बिकरू गांव में इस हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई पुलिस टीम के 8 जवानों के शहीद होने के बाद आगे क्या हुआ। 

3 जुलाई 

3 जुलाई को मीडिया ने विकास दुबे की कुंडली खंगालनी शुरू की तो पता चला कि इस बदमाश पर 60 आपराधिक मुक़दमे दर्ज हैं। यह भी जानकारी सामने आई कि दुबे को बचपन से ही जरायम की दुनिया में नाम कमाने का शौक था। वह काफी समय से गैंग बनाकर लूटपाट और हत्याएं कर रहा था और इस काम में उसे राजनेताओं और पुलिस का भी भरपूर सहयोग मिलता रहा है। 

3 जुलाई से ही विकास दुबे की कई राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ तसवीरें सोशल मीडिया पर वायरल होनी शुरू हुईं और यह काम अभी तक जारी है। दुबे ख़ुद भी जिला पंचायत का सदस्य रहा है और पत्नी को भी उसने जिला पंचायत और भाई को ग्राम प्रधान के चुनाव में जीत दिलाई थी। 

History sheeter Vikas Dubey case details - Satya Hindi
History sheeter Vikas Dubey case details - Satya Hindi

उसकी धरपकड़ तेज होने के बाद सभी राजनीतिक दल उससे पल्ला झाड़ने लगे लेकिन तसवीरों ने गवाही दी कि यह कुख़्यात बदमाश नेताओं के साथ ही आला पुलिस अफ़सरों का भी चहेता है। विकास के खासमखास लोगों की भी पुलिस अधिकारियों के साथ फ़ोटो सामने आई। 

4 जुलाई 

4 जुलाई को पुलिस-प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए बिकरू गांव में विकास दुबे के घर को जेसीबी से ढहा दिया। इस दौरान वहां खड़ी कई गाड़ियों को भी पुलिस ने चकनाचूर कर दिया। बताया गया कि विकास दुबे इस घर से अपना आपराधिक साम्राज्य चला रहा था। 

5-6 जुलाई को इस घटना में शहीद हुए सीओ, बिल्हौर देवेन्द्र मिश्रा का एक पत्र सामने आया। यह पत्र उन्होंने इसी साल 14 मार्च को एसएसपी, कानपुर को भेजा था और इसमें लिखा था कि विकास दुबे के बचाव में चौबेपुर थाने का निलंबित एसओ विनय तिवारी कुछ भी करने को तैयार था। इस मुद्दे पर देखिए, वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह का वीडियो - 

6 जुलाई 

6 जुलाई को विकास दुबे का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह एक मामले में बीजेपी के दो विधायकों का नाम लेता दिखा। यह वीडियो 2017 का बताया गया। बताया गया कि हत्या के किसी मामले में बीजेपी नेताओं ने विकास दुबे की पैरवी की थी। वीडियो में वह बीजेपी के विधायकों भगवती प्रसाद सागर, विधायक अभिजीत सांगा का नाम लेता है। लेकिन विधायक उसकी पैरवी करने की बात से इनकार करते हैं। 

7 जुलाई 

7 जुलाई को पुलिस ने विकास दुबे के तीन साथियों श्यामू वाजपेयी, जहान यादव और संजीव दुबे को गिरफ़्तार किया और इसी दौरान हरियाणा की फरीदाबाद पुलिस ने भी मुठभेड़ के दौरान विकास के तीन सहयोगियों कार्तिकेय उर्फ प्रभात निवासी बिकरू गांव, अंकुर निवासी ग्राम कापूपुर, कानपुर व एक अन्य बदमाश श्रवण को गिरफ़्तार किया। 

7 जुलाई की शाम को विकास के हरियाणा के फरीदाबाद में एक होटल में दिखने की ख़बर आई। लेकिन जब तक पुलिस वहां पहुंचती, उससे पहले ही दुबे वहां से फरार हो चुका था।

8 जुलाई 

8 जुलाई को बुधवार तड़के हमीरपुर जिले के मौदहा थानाक्षेत्र में एसटीएफ उत्तर प्रदेश एवं स्थानीय पुलिस के साथ मुठभेड़ में विकास दुबे गैंग के शातिर अपराधी अमर दुबे को मार गिराया गया। अमर दुबे कानपुर हत्याकांड का नामज़द एवं वांछित अभियुक्त था। इसी दिन विकास दुबे के एक और साथी श्यामू बाजपेयी को चौबेपुर पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। 

8 जुलाई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने कानपुर जिले के चौबेपुर पुलिस स्टेशन के एसओ विनय तिवारी और सब-इंस्पेक्टर केके शर्मा को गिरफ़्तार कर लिया। पुलिस को शक है कि पुलिस फ़ोर्स के बिकरू गांव में पहुंचने से पहले विनय तिवारी और केके शर्मा ने ही विकास दुबे को इसकी सूचना दी थी। 

9 जुलाई 

9 जुलाई की सुबह भी यह ख़बर आई कि हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के दो सहयोगियों को पुलिस ने गुरुवार सुबह अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराया है। इन दोनों में से एक तो हिरासत में था और पुलिस के अनुसार कानपुर ले जाने के दौरान भागने की कोशिश में मारा गया, जबकि दूसरे के साथ पुलिस की आमने-सामने की मुठभेड़ हुई। इनमें से एक का नाम प्रभात मिश्रा और दूसरे का नाम रणबीर उर्फ़ बउआ दुबे बताया गया। 

9 जुलाई की सुबह ही विकास दुबे के उज्जैन के महाकाल मंदिर से पकड़े जाने की ख़बर आई। इस बीच, 2 जुलाई से लेकर 8 जुलाई तक पुलिस ने विकास दुबे पर ईनामी राशि को बढ़ाकर 50 हजार से ढाई लाख और फिर 5 लाख कर दिया। 

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