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कमलेश मर्डर: परिवार को ही पुलिस की जाँच पर भरोसा नहीं, थ्योरी पर सवाल

लखनऊ में हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या के मामले में पुलिस की थ्योरी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। तिवारी की माँ ने मंदिर विवाद के एक मामले में बीजेपी के ही नेता शिव कुमार गुप्ता पर उनके बेटे की हत्या का आरोप लगाया है हालाँकि तिवारी के एक बेटे ने इससे इनकार किया है। हिंदूवादी संगठनों के बढ़ते दबाव के चलते पुलिस पर इस मामले को जल्द सुलझाने का दबाव था और उसने इस बात का दावा किया कि सूरत से पकड़े गए तीन लोगों ने ही कमलेश की हत्या को अंजाम दिया है। इस पूरे मामले को एक-एक तथ्य पर बात करके समझते हैं। 

कमलेश तिवारी की हत्या के बाद सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कहा जा रहा है कि यह कमलेश तिवारी ही बोल रहे हैं। वीडियो में कथित रूप से कमलेश तिवारी को यह कहते हुए सुना जा रहा है कि उनकी हत्या की साज़िश रची जा रही है, उनके ख़िलाफ़ षड्यंत्र रचे जा रहे हैं और योगी सरकार के आते ही उनकी सुरक्षा को भी हटा दिया गया है। 

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क्यों नहीं बढ़ाई सुरक्षा?

कमलेश तिवारी की माँ का किसी मंदिर विवाद मामले को लेकर बीजेपी नेता पर हत्या का आरोप लगाना और फिर इस वीडियो का सामने आना, यह सवाल ज़रूर खड़े करता है कि तिवारी की जान को ख़तरा था तो सुरक्षा को क्यों हटाया गया। सुरक्षा दिये जाने की मांग को लेकर तिवारी ने मांग भी की थी और प्रदर्शन भी किया था लेकिन फिर भी उनकी सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई गई?
कमलेश तिवारी की माँ का कहना है कि अखिलेश यादव की सरकार में उनके बेटे को 17 सुरक्षाकर्मी मिले थे जबकि योगी सरकार में आते ही इनकी संख्या घटाकर 4 कर दी गई। माँ ने यह भी कहा कि हत्या वाले दिन सिर्फ़ एक सुरक्षाकर्मी घर पर मौजूद था। यह इस मामले में बेहद गंभीर बात है।

प्रशासन की जाँच पर भरोसा नहीं

तिवारी के एक बेटे ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें यूपी प्रशासन की जाँच पर भरोसा नहीं है। इसका मतलब तिवारी की सुरक्षा को न बढ़ाया जाना, वीडियो में कथित रूप से हत्या की साज़िश रचने की बात सामने आना और प्रशासन की जाँच पर भरोसा न होने की बात कहने का मतलब साफ़ है कि कमलेश तिवारी के परिवार को पुलिस की थ्योरी पर यक़ीन नहीं है और यही बात तिवारी के एक बेटे सत्यम तिवारी ने भी कही है। 

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सत्यम तिवारी ने कहा है कि उन्हें नहीं पता है कि जो लोग पकड़े गए हैं उन्हीं लोगों ने उनके पिता का मर्डर किया है या साज़िश के तहत बेकसूर लोगों को फंसाया जा रहा है। बेटे ने कहा कि अगर पकड़े गए लोग वही हैं और इनके पास (पुलिस के) वीडियोग्राफ़ी है तो ये चेहरा मिलायें। तिवारी के बेटे ने कहा कि उनके पिता की हत्या के केस की जाँच एनआईए (एनआईए) को करनी चाहिए। 
पुलिस की थ्योेरी के मुताबिक़, गुजरात के सूरत के रहने वाले तीन मुसलमान युवक कमलेश तिवारी के द्वारा 2015 में पैगंबर मोहम्मद साहब को लेकर दिये गये बयान से बेहद आक्रोशित थे। इन तीनों के नाम फ़ैज़ान युनूस भाई, मौलाना मोहसिन शेख और राशिद अहमद खुर्शीद पठान बताये गये हैं।

यूपी के डीजीपी ओपी सिंह के मुताबिक़, राशिद ने कमलेश तिवारी की हत्या की योजना बनाई थी और मौलाना मोहसिन शेख ने उसे हत्या के लिये भड़काया था। डीजीपी ने कहा कि कमलेश तिवारी के घर लाये गये मिठाई के डिब्बे को आधार बनाते हुए यूपी पुलिस ने गुजरात पुलिस से संपर्क साधा और मिठाई का यह डिब्बा सूरत की जिस दुकान से खरीदा गया था, वहां के आसपास की सीसीटीवी फ़ुटेज की छानबीन के बाद एक संदिग्ध व्यक्ति फ़ैज़ान युनूस भाई को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस का कहना है कि फ़ैज़ान मिठाई का डिब्बा खरीदने में शामिल रहा है। 

कम क्यों की गई सुरक्षा?

अब सवाल यह खड़ा होता है कि आख़िर योगी सरकार के आते ही तिवारी की सुरक्षा कम क्यों की गई और मांगने के बाद भी उनकी सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई। हैरान करने वाली बात यह है कि तिवारी की हत्या वाले दिन वहां सिर्फ़ एक सुरक्षाकर्मी था और तिवारी की माँ का कहना है कि वह होमगार्ड जैसा था और उसके पास सुरक्षा के नाम पर सिर्फ़ डंडा था। 

सवाल यह भी खड़ा होता है कि पुलिस के केस को सुलझा लेने के दावे के बाद भी यह नहीं पता चल रहा है कि आख़िर तिवारी की हत्या क्यों की गई क्योंकि जब परिवार को ही पुलिस की जाँच पर भरोसा नहीं है तो पुलिस के बताये कारण को कैसे हत्या का असली कारण मान लिया जाये।

क्या लीपापोती की कोशिश हुई?

पुलिस के केस को सुलझाने के दावे के बाद तो परिवार को इस पर संतोष होना चाहिए था कि हत्यारों को पकड़ लिया गया है और केस सुलझ गया है। लेकिन परिवार के एनआईए जाँच की मांग करने से यह शक पैदा होता है कि कहीं केस को जल्द सुलझाने के दबाव में पुलिस इस मामले में लीपापोती तो नहीं कर रही है और क्या परिवार यह मानता है कि पुलिस आनन-फानन में असली कातिलों तक नहीं पहुंचना चाहती है। 

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धार्मिक आधार पर द्वेष फैलाने की कोशिश?

कमलेश तिवारी की हत्या के बाद व्हॉट्सऐप ग्रुपों में शेयर हो रहे एक मैसेज में किसी अल-हिंद ब्रिगेड के द्वारा उनकी हत्या की ज़िम्मेदारी लेने का दावा किया गया है। यह बेहद ही हल्की बात है क्योंकि इस तरह व्हॉट्सऐप ग्रुप में कोई भी मैसेज शेयर कर दिया जाएगा कि फलां संगठन ने हत्या की जिम्मेदारी ले ली है, तो इसे सिर्फ़ असली हत्यारों तक पहुंचने से पुलिस को रोकने और समाज में धार्मिक आधार पर द्वेष फैलाने की कोशिश माना जा सकता है। 

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस घटना का कुख्यात आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही पुलिस ने यह भी कहा है कि अल-हिंद ब्रिगेड का भी इस घटना से कोई संबंध नहीं मिला है। 

बहरहाल, यूपी पुलिस का कहना है कि तिवारी की हत्या में शामिल दो मुख्य अभियुक्तों तक पहुंचने की कोशिश में वह जुटी हुई है। उसने हिरासत में लिये गये तीनों लोगों के तिवारी की हत्या में शामिल होने की बात कही है। लेकिन पुलिस की जाँच और पूरी कवायद को तभी सही माना जा सकता है जब कमलेश तिवारी का परिवार पुलिस के द्वारा बताई गई थ्योरी और जाँच से पूरी तरह संतुष्ट हो, क्योंकि जो पीड़ित हैं उन्हें ही अगर पुलिस की जाँच पर भरोसा नहीं है तो पुलिस के मामले को सुलझाने के दावे पर दूसरे लोग कैसे भरोसा करेंगे और पुलिस की थ्योरी पर यक़ीन करना बेहद मुश्किल है। 

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