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लखीमपुर मामला: किसानों की हत्या सोची-समझी साज़िश थी- एसआईटी

लखीमपुर खीरी मामले में जांच के लिए बनी एसआईटी ने कहा है कि यह घटना किसानों की हत्या करने की सोची-समझी साजिश थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार, किसानों और विपक्ष के दबाव के बाद मामले के मुख्य अभियुक्त आशीष मिश्रा को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था। लेकिन आशीष मिश्रा के पिता और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी की मोदी कैबिनेट से बर्खास्तगी की मांग को लेकर किसान और विपक्ष लगातार आवाज़ उठा रहे हैं।

एसआईटी की यह रिपोर्ट बीजेपी के लिए खासी मुसीबत का कारण बन सकती है क्योंकि अजय मिश्रा टेनी कई बार कह चुके हैं कि अगर यह बात साबित हो गई कि उनका बेटा घटनास्थल पर मौजूद था तो वे अपने पद से इस्तीफ़ा दे देंगे। आशीष मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने अपनी कार से किसानों को रौंद दिया। 

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लखीमपुर खीरी की घटना में किसानों को गाड़ियों से रौंद दिया गया था। घटना में कुल 8 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें से 4 किसान भी हैं। किसानों के साथ ही बीजेपी के तीन कार्यकर्ताओं शुभम मिश्रा, श्याम सुंदर निषाद और हरि ओम मिश्रा की भी भीड़ ने जान ले ली थी। एक पत्रकार की भी मौत इस घटना में हुई थी। 

एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट किया है। प्रियंका ने कहा है, “न्यायालय की फटकार व सत्याग्रह के चलते अब पुलिस का भी कहना है कि गृह राज्यमंत्री के बेटे ने साज़िश करके किसानों को कुचला था। जांच होनी चाहिए कि इस साज़िश में गृह राज्यमंत्री की क्या भूमिका थी? लेकिन मोदी जी किसान विरोधी मानसिकता के चलते आपने तो उन्हें पद से भी नहीं हटाया है।” कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर बीजेपी के ख़िलाफ़ हल्ला बोल दिया था और योगी सरकार बुरी तरह घिर गई थी।  

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अदालत का सख़्त रुख़  

लखीमपुर खीरी मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का रवैया लगातार सख़्त रहा। अदालत ने हर सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य की पुलिस पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने सुनवाईयों के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि वह और गवाहों को खोजे, पूछताछ करे और उन्हें सुरक्षा भी दे।  

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस बिना मन के काम कर रही है और वह कार्रवाई नहीं करना चाहती और इस तरह सुबूत जुटाए जा रहे हैं कि किसी एक अभियुक्त को बचाया जा सके। 

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