राहुल गांधी की नागरिकता को चुनौती देने का मामला फिर टांय-टांय फिस्स साबित हुआ। लखनऊ की एक विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ कथित दोहरी नागरिकता के मामले में दायर एक बीजेपी कार्यकर्ता की याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि नागरिकता का फ़ैसला करने का अधिकार इस कोर्ट के पास नहीं है। यह राहुल गांधी के लिए बड़ी राहत है।

याचिका कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दाखिल की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक भी हैं और उन्होंने यह बात छिपाई है। शिशिर ने मांग की कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और जांच हो। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, पासपोर्ट एक्ट, फॉरेनर्स एक्ट, ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट जैसी कई धाराओं का हवाला दिया। उनका दावा था कि राहुल गांधी के विदेशी संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
यह शिकायत पहले रायबरेली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में दाखिल की गई थी, क्योंकि राहुल गांधी वहां से सांसद चुने गए हैं। लेकिन शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से गुहार लगाई और 17 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने मामले को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया।

विशेष न्यायाधीश आलोक वर्मा ने 14 जनवरी को सुनवाई पूरी की थी और फैसला 28 जनवरी को सुनाने की बात कही थी। आठ दिनों तक लगातार सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने दस्तावेजों का हवाला दिया और एफ़आईआर दर्ज करने की मांग की।

अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि नागरिकता या राष्ट्रीयता का मुद्दा तय करना इस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

अदालत ने इसे 'कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग' बताया और कहा कि ऐसी याचिकाओं को हतोत्साहित किया जाना चाहिए। नागरिकता जैसे मामले प्रशासनिक प्रक्रिया या विशेष कानूनी तरीकों से तय होते हैं, न कि आपराधिक शिकायत से।

राहुल की नागरिकता का विवाद क्या?

राहुल गांधी की नागरिकता पर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने पहले आरोप लगाया था कि राहुल गांधी के पास भारत के साथ साथ ब्रिटेन की भी दोहरी नागरिकता है। ऐसा ही आरोप बीजेपी के दूसरे कार्यकर्ता भी लगाते रहे हैं। वे आरोप लगाते रहे हैं कि 2003 में राहुल गांधी ने ब्रिटेन में एक कंपनी में डायरेक्टर के रूप में काम किया था। दावा किया जाता है कि कंपनी के रजिस्ट्रेशन या वार्षिक रिटर्न में उन्होंने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। 

कुछ याचिकाओं में दावा किया गया कि ब्रिटेन सरकार से दस्तावेज़ मांगे गए थे और ब्रिटेन ने भारत सरकार को कुछ रिकॉर्ड साझा किए हैं। हालांकि इसकी कभी पुष्टि नहीं हुई। अब तक इस मामले में अदालतों ने बार बार याचिकाएँ खारिज की हैं। 28 जनवरी 2026 में लखनऊ एमपी-एमएलए कोर्ट ने याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी पहले ऐसी पीआईएल को पिछले साल यानी 2025 में खारिज किया था।

राहुल पर लगातार हमला

राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल राजनीतिक विरोधी समय-समय पर उठाते रहे हैं, खासकर चुनाव के समय। लेकिन अब तक कोई कानूनी फैसला नहीं आया है जो यह साबित करे कि उनके पास दोहरी नागरिकता है। राहुल गांधी या कांग्रेस ने इस आदेश पर अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

यह फैसला संसद के आगामी बजट सत्र से पहले राहुल गांधी के लिए राहत की बात है। अब देखना है कि क्या याचिकाकर्ता हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हैं या नहीं। अदालत ने साफ़ किया है कि ऐसे आरोपों पर सीधे एफआईआर या जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता।