लखनऊ के अलीगंज इलाक़े में एक कोचिंग सेंटर वाले तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में भीषण आग लगने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई। इनमें ज्यादातर बच्चे और छात्र शामिल हैं। पांच अन्य घायल हो गए। कई छात्रों ने जान बचाने के लिए छत से छलांग लगा दी। कुछ पीड़ितों ने आग और धुएं से बचने के लिए खुद को वॉशरूम के अंदर बंद कर लिया था, लेकिन वे सभी मृत पाए गए। यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि मरने वालों में 'करीब एक दर्जन बच्चे' शामिल थे और इस मामले में उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

आग सोमवार दोपहर अलीगंज के उषा मेहता मार्ग पर स्थित तीन मंज़िला कमर्शियल बिल्डिंग में लगी। बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप थी, जबकि ऊपरी मंजिलों पर ग्राफिक एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर और कंप्यूटर कोर्स चल रहे थे।

घटना की जानकारी मिलने के बाद बचाव कार्य के लिए दमकल विभाग की 14 गाड़ियाँ मौके पर पहुंचीं। इसके अलावा एनडीआरएफ और राज्य आपदा बल की टीमें भी आग बुझाने और राहत कार्य में जुटी रहीं। दमकल कर्मियों ने क़रीब 13 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
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छत से कूदकर बचाई जान

आग लगने के बाद मंजिलों में फंसे छात्र घबराकर बचने के लिए बिल्डिंग से कूदने की कोशिश करते दिखे। घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय निवासी अमन ने एएनआई को बताया, 'धुआं बहुत ज़्यादा निकल रहा था। हमने 5-6 लोगों को बचाया। एक व्यक्ति बिल्डिंग से कूद भी गया।'

बिल्डिंग के मालिक की पहचान वीरेंद्र शुक्ला के तौर पर हुई है। उनका बेटा अखिलेश शुक्ला वहां ग्राफिक्स सेंटर चला रहा था। बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर एक पेट शॉप है, जबकि ऊपरी मंजिल पर ग्राफिक एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर है। अधिकारियों ने कहा कि बिल्डिंग के अंदर किस किस तरह के काम चल रहे थे इसके बारे में और जानकारी का इंतजार है।
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, 'यह बहुत दुखद घटना है, करीब एक दर्जन बच्चों की मौत हुई है, उच्च-स्तरीय जाँच के आदेश दिए गए हैं... सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। तेरह बच्चों को बचाया गया है।'

इमारत के मालिक की लापरवाही

शुरुआती जाँच में सामने आया है कि इमारत वीरेंद्र शुक्ला के नाम पर है। उनका बेटा अखिलेश शुक्ला इस बिल्डिंग में ग्राफिक्स सेंटर चला रहा था। घटना के बाद से पिता और पुत्र दोनों ही मौके से नदारद हैं और घर पर भी नहीं पाए गए हैं। चश्मदीदों का आरोप है कि आग लगने के बाद दमकल विभाग की टीम को पहुंचने में काफी देरी हुई, जिससे अफरा-तफरी मच गई और जान-माल का अधिक नुकसान हुआ। अपनी जान बचाने के लिए एक व्यक्ति इमारत से कूद भी गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

उच्च स्तरीय जाँच

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस घटना को बेहद दुखद बताया है और कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। यह देखा जाएगा कि बिल्डिंग में अग्निशमन उपकरण थे या नहीं, सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा था या नहीं। घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी खुद मोर्चा संभाले हुए हैं।
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आर्थिक सहायता की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है। पीएम राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना का तुरंत संज्ञान लिया और अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही, घायलों के समुचित इलाज के आदेश दिए हैं।

यह घटना लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुई, जो आमतौर पर शांत और व्यस्त इलाका माना जाता है। इस हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया है।