मथुरा के प्रमुख संत दिनेश फलाहारी ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि के तोशाखाने से हजारों करोड़ के आभूषण और दान चोरी हो चुके हैं। यह भी अयोध्या जैसा मामला है।
मथुरा के प्रमुख संत दिनेश फलाहारी
अयोध्या के राम मंदिर दान में कथित हेराफेरी और घपलेबाजी का विवाद अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर मथुरा से भी दान में बड़ी चोरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के प्रमुख और मामले के मुख्य शिकायतकर्ता पंडित दिनेश फलाहारी ने मंदिर के खजाने (तोशाखाना) से हजारों करोड़ रुपये के दान, सोने-चांदी के आभूषण और कीमती सामान चोरी होने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है।
अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट पर लगे 'दान चोरी' के आरोपों का हवाला देते हुए दिनेश फलाहारी ने अब मथुरा के मंदिर प्रशासन और तत्कालीन व्यवस्थापकों को कटघरे में खड़ा किया है। इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तुरंत CBI से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
तोशाखाना खुलते ही मचा बवाल: आभूषणों के डिब्बे मिले खाली
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में जब मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक तोशाखाने (खजाने) को कई दशकों बाद खोला गया, तो वहां का नजारा देखकर सब दंग रह गए। आरोप है कि खजाने में रखे संदूक पूरी तरह खाली पड़े थे और राजा-महाराजाओं व देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए बेशकीमती हीरे-जवाहरात और सोने के आभूषणों के डिब्बे खाली मिले। इसके अलावा, मंदिर की कई चल-अचल संपत्तियों के जरूरी कागजात भी रहस्यमय तरीके से गायब पाए गए।दिनेश फलाहारी ने आरोप लगाते हुए कहा: "सनातन धर्म के अनुयायियों ने अपनी गाढ़ी कमाई और अगाध श्रद्धा से भगवान के चरणों में जो हजारों करोड़ रुपये के आभूषण और संपत्ति दान की थी, उसे सरकारी सील की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर कुछ भ्रष्ट व्यवस्थापकों और रसूखदारों ने मिलकर साफ कर दिया। इस बड़ी साजिश का पर्दाफाश केवल एक निष्पक्ष सीबीआई जांच से ही हो सकता है।"
संतों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले पर तत्काल कड़ा रुख नहीं अपनाया गया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे प्रशासन के खिलाफ आमरण अनशन और भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर होंगे।
प्रशासन की चुप्पी और संतों में आक्रोश
मथुरा और वृंदावन के संतों का कहना है कि यह केवल पैसों की चोरी नहीं है, बल्कि करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात है। जहां एक ओर विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन को घेरने की रणनीति बना रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन अभी इस संवेदनशील मामले पर फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। देखना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संतों की इस आक्रोशित मांग और खून से लिखे खतों पर क्या संज्ञान लेते हैं, और क्या मथुरा के इस कथित तोशाखाना घोटाले की जांच वास्तव में सीबीआई के हाथों में सौंपी जाती है या नहीं।मथुरा के इस नए विवाद ने अयोध्या के चर्चित राम मंदिर दान घोटाले को चर्चा में ला दिया है। अयोध्या में भी राम मंदिर निर्माण के लिए देशव्यापी चंदे (समर्पण निधि) और जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर विपक्षी दलों और कुछ स्थानीय संतों ने गंभीर वित्तीय अनियमितताओं (Embezzlement) के आरोप लगाए हैं।
आरोप है कि कौड़ियों के दाम मिलने वाली जमीन को कुछ ही मिनटों के भीतर करोड़ों रुपये के ऊंचे दामों पर राम मंदिर ट्रस्ट को बेचकर भारी मुनाफा कमाया गया और चंदे के पैसों का दुरुपयोग हुआ। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया गया था। लेकिन अब मथुरा में भी 'राम मंदिर दान चोरी' जैसी ही घटना दोहराए जाने के दावों ने उत्तर प्रदेश की धार्मिक सियासत और मंदिर प्रबंधनों की पारदर्शिता पर एक बार फिर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।