आज़म ख़ान द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को इसके 38 भवनों को ढहाए जाने के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। मुरादाबाद मंडलायुक्त यानी डिविज़नल कमिश्नर की अदालत ने विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को गिराने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह राहत तब मिली है जब विश्वविद्यालय के छात्र पिछले 12 दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कमिश्नर अदालत ने साफ़ किया है कि मामले की अंतिम सुनवाई और निर्णय होने तक विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी भवन को नहीं गिराया जाएगा।

रामपुर विकास प्राधिकरण यानी आरडीए ने 15 जुलाई को विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस जारी कर 40 में से 38 इमारतों को 15 दिनों के भीतर गिराने का आदेश दिया था। प्राधिकरण का आरोप था कि इन भवनों का निर्माण उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के तहत ज़रूरी स्वीकृत नक्शे के बिना किया गया है। इन भवनों को गिराने की अंतिम समय-सीमा 30 जुलाई निर्धारित की गई थी।
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विश्वविद्यालय की अपील पर मिली अंतरिम राहत

विश्वविद्यालय की ओर से सोमवार को दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए मुरादाबाद के मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने ढहाने पर रोक लगा दी। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के वकील द्वारा दायर आवेदन स्वीकार कर लिया गया है और अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार कमिश्नर ने कहा कि सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड की पड़ताल करने के बाद ही अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

मंडलायुक्त ने बताया कि मंगलवार को प्रस्तावित सुनवाई नहीं हो सकेगी क्योंकि मुरादाबाद में एक अधिवक्ता के निधन के कारण शोकसभा आयोजित की जा रही है। अब मामले की अगली तारीख पर सभी पक्षों को सुनने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

रामपुर के जिलाधिकारी के अनुसार, क्षेत्रीय जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट के आधार पर यह मामला सामने आया। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया। 8 जुलाई को ट्रस्ट ने अपना जवाब दाखिल किया और 15 जुलाई को दोनों पक्षों की मौजूदगी में विस्तृत सुनवाई हुई। 

रिकॉर्ड की जांच के बाद आरडीए ने निष्कर्ष निकाला कि अधिकांश भवनों के लिए वैध स्वीकृति उपलब्ध नहीं है और इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्ष 2006 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के एक कानून के तहत हुई थी। यह विश्वविद्यालय समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आज़म खान की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल रहा है। आज़म खान लंबे समय तक विश्वविद्यालय ट्रस्ट के अध्यक्ष और कुलाधिपति रहे। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय भूमि, लीज और अतिक्रमण से जुड़े कई कानूनी विवादों में घिरा रहा है। हाल ही में आज़म खान और उनके परिवार ने विश्वविद्यालय ट्रस्ट के प्रबंधन से औपचारिक रूप से खुद को अलग कर लिया था।

12 दिनों से जारी है छात्रों का आंदोलन

जौहर विश्वविद्यालय को बचाने की मांग को लेकर छात्र पिछले 12 दिनों से विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लगातार धरना दे रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यह केवल इमारतों का मामला नहीं बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार का सवाल है। विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि ढहाने की कार्रवाई हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
विश्वविद्यालय की संस्थापक सदस्य और पूर्व राज्यसभा सांसद तज़ीन फातिमा ने पहले ही कहा था कि यदि कमिश्नर कोर्ट से राहत नहीं मिली तो वे हाईकोर्ट और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगी। पीटीआई के अनुसार उन्होंने ध्वस्तीकरण के आदेश को मनमाना और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। फातिमा ने कहा कि हम आख़िरी दम तक अपनी लड़ाई लड़ेंगे।

कुछ लोगों द्वारा विश्वविद्यालय को सरकारी नियंत्रण में लेने की मांग पर तज़ीन फातिमा ने कहा कि संविधान अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित और संचालित करने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि सरकार विश्वविद्यालय को इतनी आसानी से अपने अधीन नहीं ले सकती। तज़ीन फातिमा ने बताया कि उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत की है। उनके अनुसार छात्रों ने संकल्प लिया है कि यदि विश्वविद्यालय की इमारतें भी गिरा दी जाती हैं, तब भी वे पेड़ों के नीचे और खुले मैदान में बैठकर अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे।

'जरूरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन होगा'

आज़म ख़ान के करीबी माने जाने वाले आसिम राजा ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय को गिराने की कोशिश की गई तो राज्यव्यापी और बड़े स्तर का आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं बल्कि हजारों छात्रों की उम्मीदों का केंद्र है।
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अखिलेश यादव के समर्थन का दावा

अखिलेश यादव के रामपुर नहीं पहुंचने के सवाल पर तज़ीन फातिमा ने कहा कि समाजवादी पार्टी अध्यक्ष पहले ही अपना प्रतिनिधिमंडल भेज चुके हैं और उन्होंने जल्द रामपुर आने का भरोसा दिया है। उन्होंने दावा किया कि पूरी समाजवादी पार्टी जौहर विश्वविद्यालय के समर्थन में खड़ी है।

लखनऊ में अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी जौहर विश्वविद्यालय को बचाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय प्रदेश ही नहीं बल्कि देश का एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान है और इसे गिराने का फैसला संकीर्ण सोच का परिचायक है। मौर्य ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा संस्थानों को बचाने के बजाय उन्हें बंद करने की दिशा में काम कर रही है।

बहरहाल, कमिश्नर कोर्ट के अंतरिम आदेश से फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन और आंदोलन कर रहे छात्रों को बड़ी राहत मिली है। अब अंतिम सुनवाई पर नज़र है, जहां यह तय होगा कि रामपुर विकास प्राधिकरण का ढहाने का आदेश बरकरार रहेगा या उसे रद्द किया जाएगा। तब तक विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी।