राम मंदिर चंदा चोरी विवाद के बीच चंपत राय ने अब एक खुला ख़त लिखकर पीएम मोदी के क़रीबी माने जाने वाले नृपेंद्र मिश्रा का नाम लिया तो फिर से यह मामला चर्चा में गया। दरअसल, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने नौ पन्नों का एक खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने दावा किया है कि राम मंदिर निर्माण से जुड़े सभी अहम फ़ैसले पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव रहे नृपेंद्र मिश्रा की अध्यक्षता वाली मंदिर निर्माण समिति ने लिए थे। चंपत राय का यह पत्र तब सामने आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज और चंदा राशि के प्रबंधन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

अपने खुले पत्र में चंपत राय ने लिखा कि मंदिर निर्माण समिति नियमित रूप से बैठक करती थी और निर्माण से जुड़ा हर बड़ा निर्णय उसी समिति में लिया जाता था। उन्होंने लिखा, 'समिति की मंजूरी के बिना कोई भी काम नहीं किया गया। यदि किसी स्तर पर समिति के बाहर कोई निर्णय लिया गया तो उसे स्वीकार नहीं किया गया और ऐसे काम को वापस कराया गया।' चंपत राय के अनुसार नृपेंद्र मिश्रा स्वयं भी यह कहते थे कि मंदिर निर्माण से जुड़े निर्णयों की प्राथमिक जिम्मेदारी उनकी है।
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नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर विशेष जोर

पत्र में चंपत राय ने मंदिर निर्माण का बड़ा श्रेय नृपेंद्र मिश्रा को दिया है। उन्होंने कहा कि जून 2020 में कोविड महामारी के दौरान मंदिर निर्माण शुरू हुआ। जून 2026 तक मंदिर का मुख्य निर्माण पूरा कर समाज को समर्पित कर दिया गया। निर्माण के दौरान जब भी कोई तकनीकी समस्या आई, नृपेंद्र मिश्रा ने संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को अयोध्या बुलाकर समाधान कराया। अधिकांश विशेषज्ञों ने बिना किसी पारिश्रमिक के सेवा भाव से काम किया।

एजेंसियों का चयन कैसे हुआ?

चंपत राय ने पत्र में बताया कि लार्सन एंड टुब्रो को मंदिर निर्माण का काम सौंपा गया। टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स यानी टीसीई को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट बनाया गया। मंदिर की मूल वास्तु योजना के लिए प्रसिद्ध वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा को ही जिम्मेदारी दी गई। अन्य सहायक भवनों की डिजाइन के लिए डिजाइन एसोसिएट्स को चुना गया। उन्होंने कहा कि इन सभी चयन प्रक्रियाओं में भी निर्माण समिति की अहम भूमिका रही।

पत्र में चंपत राय ने ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दर्शन पास पूरी तरह निशुल्क हैं। आरती पास के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

उन्होंने कहा कि प्रसाद भी मुफ्त दिया जाता है। पुजारी केवल धार्मिक अनुष्ठानों का कार्य करते हैं और श्रद्धालुओं से दक्षिणा नहीं लेते। उन्होंने बताया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों, दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ आने वाली माताओं के लिए सुगम दर्शन की विशेष व्यवस्था भी निशुल्क उपलब्ध है।

ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था कैसी?

कथित चंदा चोरी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चंपत राय ने ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था का भी विस्तार से ज़िक्र किया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के खाते स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा में हैं। ट्रस्ट ने जानबूझकर चेकबुक सुविधा नहीं ली है। सभी भुगतान केवल बैंक ट्रांसफर के ज़रिए किए जाते हैं। नकद भुगतान नहीं किया जाता।
जीएसटी, टीडीएस, श्रम उपकर, पीएफ़ और ईएसआई जैसे सभी सरकारी भुगतान नियमों के अनुसार जमा किए जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट के खातों का आंतरिक और वैधानिक ऑडिट अलग-अलग चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों द्वारा किया जाता है।

चंदा विवाद के बीच आया पत्र

चंपत राय का यह खुला पत्र तब सामने आया है जब राम मंदिर में आए दान और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग को लेकर विवाद जारी है। हाल ही में सामने आए मामलों के बाद ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठे थे। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी की रिपोर्ट में कुछ लोगों को आरोपी बनाया गया है, हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार नृपेंद्र मिश्रा और चंपत राय का नाम आरोपियों में शामिल नहीं है।

नृपेंद्र मिश्रा की प्रतिक्रिया

जब पत्रकारों ने चंपत राय के पत्र में उनके बारे में किए गए ज़िक्र पर प्रतिक्रिया मांगी तो नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, 'मैंने वह पत्र देखा ही नहीं है। आप लोग केवल विवाद खड़ा करना चाहते हैं।' उन्होंने पत्र में किए गए दावों पर कोई विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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चंपत राय के इस पत्र के बाद अब राम मंदिर निर्माण में फ़ैसले लेने की प्रक्रिया, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर पत्र में मंदिर निर्माण समिति और उसकी निर्णय प्रक्रिया का विस्तार से बचाव किया गया है, वहीं दूसरी ओर चंदा और पैसे के हेरफेर से जुड़े विवादों के कारण ट्रस्ट की पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल अभी भी राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हुए हैं।