संभल के चीफ जुडिशियल मैजिस्ट्रेट की कोर्ट ने एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर और 12-20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह मामला 2024 में जामा मस्जिद सर्वे हिंसा के दौरान कथित फायरिंग से जुड़ा है।
संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत ने मंगलवार को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर और 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। आरोप है कि संभल हिंसा के दौरान, जो जामा मस्जिद सर्वे से जुड़ी थी, एक युवक को गोली मारी गई थी।
अदालत ने पीड़ित परिवार की याचिका स्वीकार कर ली थी। इसमें तत्कालीन सर्कल ऑफिसर (सीओ) संभल अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर की मांग की गई थी। पीड़ित परिवार के वकील अख्तर हुसैन ने याचिका में कहा कि “मेरे मुवक्किल के बेटे को पुलिस के दबाव से बचने के लिए गुप्त रूप से इलाज कराना पड़ा। हमने अदालत में उन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। सीजेएम ने सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।”
यह मामला 24 नवंबर 2024 को संभल में हुई हिंसा से जुड़ा है, जो अदालत के आदेश पर जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की थी। शिकायत के अनुसार, नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन के निवासी यामीन ने 6 फरवरी 2025 को सीजेएम अदालत में याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका 24 वर्षीय बेटा आलम 24 नवंबर को रस्क (टोस्ट) बेचने घर से निकला था और शाही जामा मस्जिद क्षेत्र पहुंचते ही पुलिसकर्मियों ने उसे गोली मार दी थी।
याचिका में तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी, संभल कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर और अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था। अदालत ने 9 जनवरी 2026 को मामले की सुनवाई की और उसके बाद सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। यह आदेश मंगलवार को सार्वजनिक हुआ।
वर्तमान में अनुज चौधरी फिरोजाबाद में एएसपी (ग्रामीण) के पद पर तैनात हैं, जबकि अनुज तोमर संभल में चंदौसी कोतवाली के थाना प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। संभल हिंसा के समय अनुज चौधरी संभल के सीओ थे और इसके बाद उन्हें एएसपी पद पर पदोन्नत किया गया।
संभल हिंसा कैसे हुई थी
संभल में हिंसा जामा मस्जिद विवाद के बीच भड़की, जिसमें हिंदू पक्ष का दावा था कि यह स्थान मूल रूप से हरिहर मंदिर था, जिसे 1529 में बाबर ने ध्वस्त कर मस्जिद बनवाई थी। इस दावे पर 19 नवंबर 2024 को संभल अदालत में याचिका दायर की गई। उसी दिन सिविल जज (वरिष्ठ खंड) आदित्य सिंह ने मस्जिद परिसर का सर्वे आदेश दिया और रमेश सिंह राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया।
संभल में 20 नवंबर 2024 को हिंसा तब शुरू हुईं जब अदालत द्वारा नियुक्त एक अधिवक्ता आयुक्त और उनकी टीम के छह सदस्य सुबह करीब सात बजे दूसरे सर्वेक्षण के लिए मस्जिद में दाखिल हुए। अदालत के आदेश पर पहला सर्वेक्षण 19 नवंबर को किया गया था। डिवीजनल कमिश्नर ने दावा किया कि “सर्वे टीम अदालत के अधिवक्ता आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और सुरक्षा कर्मियों की एक टीम के साथ सर्वेक्षण के लिए मौके पर पहुंची। लोगों का समूह जल्द ही घटनास्थल पर पहुंच गया और नारे लगाने और पथराव करने लगा।'' हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्वे टीम के साथ आए लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए और मस्जिद में घुसने की कोशिश की। इसका भीड़ ने विरोध किया। इसके बाद पथराव हुआ। पुलिस ने तुरंत ही फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना में 4 मुस्लिम युवक मारे गए हैं। चौथे युवक की मौत बाद में हुई। पुलिस ने मारे गए लोगों के परिवारों से राजीनामा करने की कोशिश की और न करने पर उन्हें फंसाने की धमकी दी।
पुलिस ने दंगा करने के आरोप में 79 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें तीन महिलाएं शामिल थीं। संभल कोतवाली और नखासा थाने में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गईं। 40 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए, जिसमें समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और एसपी विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल शामिल हैं, साथ ही 2,750 अज्ञात व्यक्ति। 18 जून को विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने 23 लोगों के खिलाफ 1,128 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की, जिसमें सांसद जिया-उर-रहमान बर्क शामिल थे।
अनुज चौधरी विवादित क्यों है
संभल के तत्कालीन एसओ अनुज चौधरी का संभल में कार्यकाल विवादों में रहा है। वो 2025 में संभल में ही थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 6 मार्च 2025 को संभल कोतवाली में एक शांति समिति की बैठक हुई, जिसका मकसद सांप्रदायिक सद्भाव कायम करना था। क्योंकि उस साल 14 मार्च को होली और रमज़ान के दौरान शुक्रवार की नमाज़ एकसाथ पड़ रही थी। बैठक के दौरान, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) अनुज चौधरी ने कहा, "रंगों का त्योहार साल में केवल एक बार आता है, जबकि जुमा साल में 52 बार आता है। इसलिए मैं अपने मुस्लिम भाइयों को सलाह देता हूं, जो सोचते हैं कि शुक्रवार की नमाज़ के लिए जाते समय उन पर रंग पड़ना एक अधर्मी कार्य होगा, वे घर के अंदर रहें जब तक कि सड़कों पर होली का उत्सव समाप्त न हो जाए।" चौधरी तब भी सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने अपनी पुलिस वर्दी में भगवान हनुमान का गदा लेकर एक धार्मिक जुलूस का नेतृत्व किया था। इस घटना का एक वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें स्पष्टीकरण मांगते हुए एक नोटिस मिला था।
पुलिस अधिकारी ने संभल में हुई शांति समिति में जो बातें कहीं थीं, वही उन्होंने बैठक से निकलने के बाद मीडिया बाइट में भी कहा। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने इंडिया टुडे के कार्यक्रम में इस मुद्दे पर सवाल होने पर अनुज चौधरी के बयान को सही ठहराने की कोशिश की थी। योगी ने कार्यक्रम में मंच से कहा पुलिस अधिकारी (अनुज चौधरी) ने एक "पहलवान" के रूप में बात की होगी। चौधरी एक पूर्व पहलवान और अर्जुन पुरस्कार विजेता हैं। उन्होंने कहा, "त्योहारों के दौरान हमें एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। नमाज़ हर शुक्रवार को अदा की जाती है, लेकिन होली साल में केवल एक बार आती है। नमाज़ को टाला जा सकता है, और अगर कोई समय पर (सामान्य समय दोपहर 1.30 बजे) शुक्रवार की नमाज़ अदा करना चाहता है, तो वह अपने घर में रहकर ऐसा कर सकता है। नमाज़ के लिए मस्जिद जाना अनिवार्य नहीं है।" हालांकि अनुज चौधरी को शायद यह नहीं मालूम की जुमे की नमाज़ समूह में ही पढ़ी जाती है और उसके लिए ही लोग मस्जिद जाते हैं।
पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी के बयान को पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह सहि कई पूर्व पुलिस अधिकारियों ने पसंद नहीं किया। उत्तर प्रदेश में विपक्ष और मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने भी संभल पुलिस अधिकारी के बयान पर चिंता जताई और आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के अधिकारी भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। सपा के सांसद और महासचिव राम गोपाल यादव ने दावा किया कि संभल में दंगे कराने वाला अनुज चौधरी ही था। "आप एक ऐसे पुलिसकर्मी से क्या उम्मीद कर सकते हैं जिसने हिंसा के दौरान लोगों को भड़काया। ऐसे लोग तब जेल में होंगे जब सरकार बदलेगी।" कांग्रेस नेता आदित्य गोस्वामी ने डिप्टी एसपी के खिलाफ मुरादाबाद के डीआईजी मुनीराज जी से शिकायत की। उन्होंने कहा, "यह पुलिसकर्मी धर्म के नाम पर लोगों के बीच दरार पैदा करने और नफरत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उनका बयान अत्यंत आपत्तिजनक था, जो केवल दोनों समुदायों के बीच नफरत पैदा करेगा।"