संभल हिंसा में विवादित पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर का आदेश देने वाले जज का तबादला करके उन्हें डिमोट कर दिया गया। उनकी जगह अब वही जज आए हैं, जिन्होंने जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया था। उन्हें प्रमोशन दिया गया है।
पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी और सीएम योगी आदित्यनाथ
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 न्यायिक अधिकारियों के ट्रांसफर का आदेश जारी किया है। इसमें चंदौसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर भी शामिल हैं, जिन्होंने नवंबर 2024 में हुई संभल हिंसा के दौरान पुलिस फायरिंग से एक युवक की मौत होने के मामले में तत्कालीन सर्किल ऑफिसर (सीओ) अनुज चौधरी और एसएचओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। पुलिस अधिकारियों ने इस आदेश की तौहीन करते हुए अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है। और अब जज का भी तबादला कर दिया गया है।
सर्वे वाले जज को प्रमोशन के साथ वापस लाया गया
चंदौसी के नए CJM आदित्य सिंह होंगे। आदित्य सिंह ने ही सिविल जज (सीनियर डिविजन) रहते हुए जामा मस्जिद सर्वे के आदेश दिए थे। एक तरह से इन्हें प्रमोशन दिया गया है। संभल हिंसा में CO अनुज चौधरी सहित कई पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश देने वाले CJM विभांशु सुधीर हटाए गए, सुल्तानपुर ट्रांसफर किया।
जज का डिमोशन
विभांशु सुधीर को अब सुल्तानपुर में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर भेजा गया है। विभांशु चंदौसी में सीजेएम थे। लेकिन सुल्तानपुर में वो सिविल जज होंगे। आदित्य सिंह सिविल जज को प्रमोशन देकर सीजेएम चंदौसी बनाया गया है। संभल चंदौसी न्यायिक क्षेत्र में आता है।
यह स्थानांतरण आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी किया गया है। स्थानांतरण की सूची में सुल्तानपुर, सीतापुर और कन्नौज जैसे जिलों के कई अन्य न्यायिक अधिकारी भी शामिल हैं, जिनमें शामिल हैं:अलंकृता शक्ति त्रिपाठी: अब सुल्तानपुर में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पद पर। उरूज फातिमा: सीतापुर में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट। अंशु शुक्ला, गौरव प्रकाश, राजेंद्र कुमार सिंह, श्रद्धा भारतीया और ज्योत्सना यादव जैसे अन्य अधिकारी विभिन्न पदों पर स्थानांतरित हुए हैं। इस सूची से साफ है कि सुल्तानपुर में एसीजेएम अलंकृता शक्ति त्रिपाठी होंगी, विभांशु सुधीर उनके नीचे सिविल जज होंगे।
नवंबर 2024 में संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा में पुलिस फायरिंग हुई थी, जिसमें एक 23 वर्षीय बिस्कुट विक्रेता (आलम, निवासी खग्गू सराय) को गोली लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई। इस मामले में विभांशु सुधीर ने 19 जनवरी 2026 को संभल पुलिस को निर्देश दिया था कि तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी (अब फिरोजाबाद में एडिशनल एसपी), तत्कालीन एसएचओ अनुज कुमार तोमर और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
संभल पुलिस ने इस आदेश को "अवैध" बताते हुए कहा था कि वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील करेंगे और एफआईआर दर्ज नहीं करेंगे। जज विभांशु सुधीर के तबादले के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। यह तबादला न्यायिक अधिकारियों के नियमित तबादलों के तौर पर पेश किया जा रहा है। लेकिन सीजेएम के हालिया आदेश के बाद हुए इस तबादले ने सवाल तो खड़े ही कर दिए हैं। आखिर ये तबादला अभी क्यों। इससे जूडिशरी को एक तरह का संदेश भी देने की कोशिश की गई है।
संभल में हिंसा कैसे हुई थी
संभल में हिंसा जामा मस्जिद विवाद के बीच भड़की, जिसमें हिंदू पक्ष का दावा था कि यह स्थान मूल रूप से हरिहर मंदिर था, जिसे 1529 में बाबर ने ध्वस्त कर मस्जिद बनवाई थी। इस दावे पर 19 नवंबर 2024 को संभल अदालत में याचिका दायर की गई। उसी दिन सिविल जज (वरिष्ठ खंड) आदित्य सिंह ने मस्जिद परिसर का सर्वे आदेश दिया और रमेश सिंह राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया।
संभल में 20 नवंबर 2024 को हिंसा तब शुरू हुईं जब अदालत द्वारा नियुक्त एक अधिवक्ता आयुक्त और उनकी टीम के छह सदस्य सुबह करीब सात बजे दूसरे सर्वेक्षण के लिए मस्जिद में दाखिल हुए। अदालत के आदेश पर पहला सर्वेक्षण 19 नवंबर को किया गया था। डिवीजनल कमिश्नर ने दावा किया कि “सर्वे टीम अदालत के अधिवक्ता आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और सुरक्षा कर्मियों की एक टीम के साथ सर्वेक्षण के लिए मौके पर पहुंची। लोगों का समूह जल्द ही घटनास्थल पर पहुंच गया और नारे लगाने और पथराव करने लगा।'' हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्वे टीम के साथ आए लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए और मस्जिद में घुसने की कोशिश की। इसका भीड़ ने विरोध किया। इसके बाद पथराव हुआ। पुलिस ने तुरंत ही फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना में 4 मुस्लिम युवक मारे गए हैं। चौथे युवक की मौत बाद में हुई। पुलिस ने मारे गए लोगों के परिवारों से राजीनामा करने की कोशिश की और न करने पर उन्हें फंसाने की धमकी दी।
पुलिस ने दंगा करने के आरोप में 79 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें तीन महिलाएं शामिल थीं। संभल कोतवाली और नखासा थाने में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गईं। 40 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए, जिसमें समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और एसपी विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल शामिल हैं, साथ ही 2,750 अज्ञात व्यक्ति। 18 जून को विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने 23 लोगों के खिलाफ 1,128 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की, जिसमें सांसद जिया-उर-रहमान बर्क शामिल थे।
अनुज चौधरी विवादित क्यों है
संभल के तत्कालीन एसओ अनुज चौधरी का संभल में कार्यकाल विवादों में रहा है। वो 2025 में संभल में ही थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 6 मार्च 2025 को संभल कोतवाली में एक शांति समिति की बैठक हुई, जिसका मकसद सांप्रदायिक सद्भाव कायम करना था। क्योंकि उस साल 14 मार्च को होली और रमज़ान के दौरान शुक्रवार की नमाज़ एकसाथ पड़ रही थी। बैठक के दौरान, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) अनुज चौधरी ने कहा, "रंगों का त्योहार साल में केवल एक बार आता है, जबकि जुमा साल में 52 बार आता है। इसलिए मैं अपने मुस्लिम भाइयों को सलाह देता हूं, जो सोचते हैं कि शुक्रवार की नमाज़ के लिए जाते समय उन पर रंग पड़ना एक अधर्मी कार्य होगा, वे घर के अंदर रहें जब तक कि सड़कों पर होली का उत्सव समाप्त न हो जाए।" चौधरी तब भी सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने अपनी पुलिस वर्दी में भगवान हनुमान का गदा लेकर एक धार्मिक जुलूस का नेतृत्व किया था। इस घटना का एक वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें स्पष्टीकरण मांगते हुए एक नोटिस मिला था।
पुलिस अधिकारी ने संभल में हुई शांति समिति में जो बातें कहीं थीं, वही उन्होंने बैठक से निकलने के बाद मीडिया बाइट में भी कहा। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने इंडिया टुडे के कार्यक्रम में इस मुद्दे पर सवाल होने पर अनुज चौधरी के बयान को सही ठहराने की कोशिश की थी। योगी ने कार्यक्रम में मंच से कहा पुलिस अधिकारी (अनुज चौधरी) ने एक "पहलवान" के रूप में बात की होगी। चौधरी एक पूर्व पहलवान और अर्जुन पुरस्कार विजेता हैं। उन्होंने कहा, "त्योहारों के दौरान हमें एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। नमाज़ हर शुक्रवार को अदा की जाती है, लेकिन होली साल में केवल एक बार आती है। नमाज़ को टाला जा सकता है, और अगर कोई समय पर (सामान्य समय दोपहर 1.30 बजे) शुक्रवार की नमाज़ अदा करना चाहता है, तो वह अपने घर में रहकर ऐसा कर सकता है। नमाज़ के लिए मस्जिद जाना अनिवार्य नहीं है।" हालांकि अनुज चौधरी को शायद यह नहीं मालूम की जुमे की नमाज़ समूह में ही पढ़ी जाती है और उसके लिए ही लोग मस्जिद जाते हैं।
पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी के बयान को पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह सहि कई पूर्व पुलिस अधिकारियों ने पसंद नहीं किया। उत्तर प्रदेश में विपक्ष और मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने भी संभल पुलिस अधिकारी के बयान पर चिंता जताई और आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के अधिकारी भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। सपा के सांसद और महासचिव राम गोपाल यादव ने दावा किया कि संभल में दंगे कराने वाला अनुज चौधरी ही था। "आप एक ऐसे पुलिसकर्मी से क्या उम्मीद कर सकते हैं जिसने हिंसा के दौरान लोगों को भड़काया। ऐसे लोग तब जेल में होंगे जब सरकार बदलेगी।" कांग्रेस नेता आदित्य गोस्वामी ने डिप्टी एसपी के खिलाफ मुरादाबाद के डीआईजी मुनीराज जी से शिकायत की। उन्होंने कहा, "यह पुलिसकर्मी धर्म के नाम पर लोगों के बीच दरार पैदा करने और नफरत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उनका बयान अत्यंत आपत्तिजनक था, जो केवल दोनों समुदायों के बीच नफरत पैदा करेगा।"