देश में तीन करोड़ से ज़्यादा मामले निचली अदालतों में सड़ रहे हैं। 40 लाख से ज़्यादा हाई कोर्टों में फंसे पड़े हैं और 60 हज़ार तो आपकी ही टेबल पर हैं मी लॉर्ड। 1951 के दो मुक़दमे 2019 तक पेंडिंग हैं। सुनिए शीतल पी. सिंह का विश्लेषण।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।

























