उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी बीजेपी संगठन में बड़ा फेरबदल किया गया है। गुरुवार को पार्टी ने नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की, जिसमें 19 प्रदेश उपाध्यक्ष और 8 प्रदेश महामंत्रियों की नियुक्ति की गई है। इस नई टीम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुईं पूजा पाल को भी प्रदेश उपाध्यक्ष की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।

नीरज सिंह को मिली बड़ी जिम्मेदारी

बीजेपी की नई प्रदेश टीम में सबसे ज़्यादा चर्चा नीरज सिंह की नियुक्ति को लेकर हो रही है। नीरज सिंह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे हैं और लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनके बड़े भाई पंकज सिंह भी पहले प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में अब बीजेपी ने नीरज सिंह को भी प्रदेश नेतृत्व में अहम स्थान देकर संगठन में उनकी भूमिका बढ़ा दी है।
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नई सूची में पूर्व विधायक और हाल ही में समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुईं पूजा पाल को भी प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी पिछड़े, दलित और महिला वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए ऐसे नेताओं को संगठन में प्रमुख स्थान दे रही है, जिनकी विभिन्न सामाजिक वर्गों में पहचान है।

सपा के पीडीए के जवाब में ओबीसी चेहरों पर जोर

बीजेपी ने नई टीम में अलग-अलग जातियों को जगह दी है। खासतौर पर वोटबैंक के नज़रिए से अहम ओबीसी समुदाय को सबसे ज्यादा जगह मिली है। 46 नए नियुक्त सदस्यों में से 20 ओबीसी हैं। इसमें 8 उपाध्यक्ष, 4 महासचिव और 8 सचिव हैं। 6 पदाधिकारी अनुसूचित जाति यानी एससी से हैं। इस तरह टीम के 58% से ज्यादा नेता ओबीसी और एससी समुदाय से हैं। यह बीजेपी का समाजवादी पार्टी के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक वाले चुनावी नैरेटिव का सीधा जवाब है, जिसकी वजह से 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें 62 से घटकर 33 रह गई थीं। फिर भी, बीजेपी ने अपने पारंपरिक वोट बैंक अगड़ी जातियों को भी अच्छी जगह दी है। 46 नए पदाधिकारियों में 7 ब्राह्मण, 6 ठाकुर और 7 वैश्य, भूमिहार और कायस्थ हैं।

अगड़ी जातियों के नेता कुल टीम का क़रीब 42% हैं। यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि कुछ महीने पहले यूजीसी के नए नियमों को लेकर अगड़ी जाति और दक्षिणपंथी समूहों ने बीजेपी सरकार का खूब विरोध किया था।

कई वरिष्ठ नेताओं को भी जिम्मेदारी

प्रदेश उपाध्यक्षों की सूची में कई पुराने और अनुभवी नेताओं को भी जगह दी गई है। इनमें पूर्व मंत्री सुरेश राणा, पूर्व सांसद प्रियंका रावत और वरिष्ठ नेता कृष्ण बिहारी राय शामिल हैं। बीजेपी ने इस बार संगठन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया है।

कुल मिलाकर टीम अब 48 सदस्यों की हो गई है। इसमें चौधरी और राज्य महासचिव (संगठन) धर्मपाल सिंह भी शामिल हैं। पुरानी टीम 43 सदस्यों की थी जिसमें 18 उपाध्यक्ष, 7 महासचिव और 16 सचिव थे। उपाध्यक्षों में सिर्फ 4 पुराने लोगों- ब्रज बहादुर, मोहित बेनीवाल, धर्मेंद्र सिंह और देवेश कुमार कोरी को रखा गया है। राज्य महासचिवों में सिर्फ 2- राम प्रताप सिंह चौहान और संजय राय को रखा गया है। प्रियंका सिंह रावत को उपाध्यक्ष बना दिया गया है। राज्य सचिव अभिजात मिश्रा को तरक्की देकर राज्य महासचिव बना दिया गया है।

दिनेश प्रताप सिंह बने मुख्य प्रवक्ता

बीजेपी ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और विधान परिषद सदस्य दिनेश प्रताप सिंह को प्रदेश का मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया है। इसके अलावा मनीष दीक्षित को प्रदेश मीडिया समन्वयक और हिमांशु राज पंडित को सोशल मीडिया समन्वयक बनाया गया है।

पंकज चौधरी ने तैयार की नई टीम

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने यह नई टीम तैयार की है। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के से ख़बर दी गई है कि इसके लिए लखनऊ और दिल्ली के बीच कई दौर की बैठकों और विचार-विमर्श का सिलसिला चला। बताया जा रहा है कि टीम के गठन से पहले केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी लगातार चर्चा की गई।

2027 चुनाव पर नजर

बीजेपी की नज़र 2027 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने पर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 403 में से 255 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। हालाँकि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को उत्तर प्रदेश में अपेक्षित सफलता नहीं मिली। बीजेपी को 33 सीटें मिलीं, जबकि समाजवादी पार्टी 37 सीटों के साथ राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। यही कारण है कि बीजेपी अब संगठन को नए सिरे से मज़बूत करने और सभी सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम कर रही है।
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सामाजिक संतुलन पर जोर

कहा जा रहा है कि नई प्रदेश टीम तैयार करते समय महिलाओं, दलितों, पिछड़ों, अनुसूचित जनजातियों और विभिन्न क्षेत्रीय समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि व्यापक सामाजिक भागीदारी के ज़रिए पार्टी 2027 के चुनाव में मज़बूत स्थिति बना सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं बल्कि 2027 की चुनावी रणनीति का हिस्सा है। राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह को बड़ी जिम्मेदारी देना, पूजा पाल जैसी विपक्ष से आई नेता को प्रमुख पद देना और विभिन्न सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देना भाजपा के बड़े चुनावी समीकरणों का संकेत माना जा रहा है। बहरहाल, नई टीम संगठन को कितना मजबूत बना पाती है और बीजेपी को 2027 के चुनावी मुकाबले में कितना फायदा पहुंचा पाती है, यह तो अगले कुछ महीनों में ही पता चल पाएगा।