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योगी सरकार अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन वाली योजना बंद करेगी?

जिन्हें लग रहा है कि योगी सरकार 'लव जिहाद' के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ़ जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए अध्यादेश ले आई है उन्हें इसी सरकार के एक फ़ैसले से पूरी स्थिति साफ़-साफ़ नज़र आ सकती है। योगी सरकार 44 साल पुरानी एक ऐसी योजना बंद करने की तैयारी कर रही है जो इंटरफेथ मैरेज यानी अलग-अलग धर्म के लोगों के बीच शादी को बढ़ावा देती है। माना जाता है कि अलग-अलग धर्म के लोगों के बीच शादी से धर्मनिरपेक्षता की जड़ें मज़बूत होती हैं। तो क्या अंतरधार्मिक शादी से दिक्कत है?

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यह सवाल तब से उठ रहा है जब अध्यादेश लाने से पहले एक नवंबर को ही योगी आदित्यनाथ ने 'लव जिहाद' का ज़िक्र करते हुए कहा था कि जो कोई भी हमारी बहनों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करेगा उसकी 'राम नाम सत्य है' की यात्रा अब निकलने वाली है। हालाँकि उन्होंने अपने बयान में किसी धर्म का नाम नहीं लिया, लेकिन इस बयान से उनका इशारा साफ़ था और यह भी कि इसके परिणाम क्या होंगे। हालाँकि यूपी में इस दिशा में काम पिछले एक साल से हो रहा है, लेकिन इसमें तेज़ी तब आई जब योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों कहा कि 'लव जिहाद' पर क़ानून लाया जाएगा।

यही सवाल अब भी उठेगा कि धर्मनिरक्षेता के विचार को बढ़ावा देने वाली योजना पर नज़र क्यों है? उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय एकीकरण विभाग द्वारा शुरू की गई इंटरकास्ट एंड इंटरफेथ मैरेज इंसेंटिव योजना 1976 से लागू है।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए एक इंटरफेथ दंपति शादी के दो साल के भीतर ज़िला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन कर सकता है। सत्यापन के बाद ज़िला मजिस्ट्रेट आवेदन को यूपी राष्ट्रीय एकीकरण विभाग को भेज देता है।
उत्तर प्रदेश से जब उत्तराखंड अलग हुआ तो इसने प्रोत्साहन योजना इंटरकास्ट एंड इंटरफेथ मैरेज इंसेंटिव योजना को बरकरार रखा। लेकिन अब उत्तराखंड भी इस योजना को वापस लेने पर विचार कर रहा है। बता दें कि क़रीब एक पखवाड़े पहले ही उत्तराखंड की बीजेपी सरकार पर इसके लिए दबाव भी बनाया जा रहा था। सुदर्शन टीवी के सुरेश चव्हाणके ने तो इस प्रोत्साहन योजना को लेकर सवाल उठाए थे और दूसरे राज्यों में लव जिहाद के क़ानून बनाए जाने का ज़िक्र किया।   

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी के एक अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पिछले साल 11 इंटरफेथ जोड़ों ने इस योजना के तहत आवेदन किया था और प्रत्येक को 50 हज़ार रुपये मिले। लेकिन इस साल एक भी रुपया नहीं दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 4 आवेदन आए वे भी लंबित हैं। अधिकारी ने कहा है कि इस पर अब तब विचार किया जाएगा जब गैर क़ानूनी धर्मांतरण से जुड़े इस अध्यादेश पर फिर से विचार हो जाएगा। 

रिपोर्ट के अनुसार यूपी सरकार के प्रवक्ता और मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि फ़िलहाल योजना चल रही है, लेकिन उन्होंने इस पर टिप्पणी देने से इनकार कर दिया कि आगे जारी रहेगी या नहीं। यूपी के मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी ने कहा कि उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं है इसलिए वह टिप्पणी नहीं कर सकते हैं।

लव जिहाद की बात एक जगह से निकली तो एक के बाद एक बीजेपी शासित कई राज्यों ने लव जिहाद पर क़ानून बनाने की बात कही।

उत्तर प्रदेश के बाद हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार, मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार और कर्नाटक सरकार ने भी 'लव जिहाद' पर क़ानून लाने की बात कही। असम में भी बीजेपी लव जिहाद को मुद्दा बनाने की बात कह चुकी है। 

ये तो बीजेपी शासित राज्य सरकारें हैं जो इसको ख़त्म करने की तैयारी में हैं। वैसे, केंद्र की बीजेपी सरकार भी ऐसे ही प्रोत्साहन वाली दूसरी योजना के ख़िलाफ़ रही है। 2018 में संसद में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री विजय सांपला ने कहा था कि ऐसे मामलों में प्रोत्साहन को जारी रखने की केंद्र सरकार की कोई योजना नहीं है। तब लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा था, 'फ़िलहाल, इस योजना का विस्तार करने के लिए कोई योजना (सामाजिक एकता के लिए डॉ. आंबेडकर योजना) नहीं है।'

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