सपा पर ओमप्रकाश राजभर और केशव प्रसाद मौर्य के बयानों बीच अयोध्या से सपा के दलित सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि भाजपा पूरी तरह से "हड़बड़ाई" हुई है, इसलिए बेबुनियाद अफवाहें फैला रही है।
अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के भीतर मचे आंतरिक घमासान के बाद, अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। सत्ता पक्ष यानी बीजेपी जहां सपा में बड़ी बगावत का दावा कर रही है, वहीं सपा नेतृत्व ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए इसे भाजपा की घबराहट का नतीजा बताया है।
अयोध्या के दलित सांसद का बीजेपी पर हमला
अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने गुरुवार को बीजेपी पर ज़बरदस्त हमला किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की बढ़ती लोकप्रियता और जनता के बढ़ते भरोसे को देखकर भाजपा पूरी तरह से "हड़बड़ा" (rattled) गई है, इसलिए इस तरह के बेबुनियाद बयान दे रही है। उन्होंने कहा… जनता का विश्वास, भरोसा और आस्था सपा और अखिलेश यादव के प्रति बढ़ गई है…।
...बहादुर लोगों की टीम की ज़रूरतः अखिलेश
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इन अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए कहा: "समाजवादी पार्टी पूरी तरह एकजुट है। इस पार्टी ने अपने सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। यह एक मजबूत पार्टी है और हमारे लोग बहादुर हैं। भाजपा हमेशा लालच, डर और दबाव का इस्तेमाल कर विपक्षी पार्टियों में दलबदल कराती रही है। भाजपा का मुकाबला करने के लिए बहादुर लोगों की टीम की जरूरत है।" अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए ओम प्रकाश राजभर पर भी तंज कसा और कहा कि जो लोग भविष्यवाणियां कर रहे हैं, वे पहले यह साफ करें कि भाजपा उन्हें गठबंधन में 50 या 75 सीटें दे भी रही है या सिर्फ खोखले आश्वासन। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने भाजपा के साथ गठबंधन में 30 सीटें मिलने की अफवाहों पर 'एडवांस' दे रखा था, वे अब उन्हें ढूंढ रहे हैं।
इसके साथ ही सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने भी साफ किया कि पार्टी 2027 के चुनावों के लिए बेहद मजबूत और एकजुट है।
भाजपा और राजभर ने सपा को लेकर क्या अफवाह फैलाई
सपा में कथित टूट की अफवाहों को तब हवा मिली जब उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुख्य ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया (X) पर एक बड़ा दावा किया। राजभर ने दावा किया कि सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र सौंपा है। उन्होंने कहा कि खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की जांच की आंच जैसे-जैसे करीब आ रही है, सपा के भीतर बेचैनी बढ़ रही है। राजभर के मुताबिक, महाराष्ट्र और बंगाल को भूल जाइए, उत्तर प्रदेश में पूरी समाजवादी पार्टी ही भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार बैठी है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी दावा किया कि सपा के 25 से 26 सांसद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी छोड़ने के लिए तैयार हैं। मौर्य ने साफ किया कि भाजपा किसी पार्टी को तोड़ नहीं रही है, बल्कि ये पार्टियां अपने "परिवारवाद, भ्रष्टाचार और आपराधिक प्रवृत्तियों" के कारण खुद ही बिखर रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "सपा वापस सैफई जा रही है; भाजपा लखनऊ में है और सत्ता में बनी रहेगी।"
समय से पहले यूपी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट क्यों?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अफवाहों के बीच समय से पहले विधानसभा चुनाव होने की अटकलें भी तेज हैं। इसके पीछे कुछ मुख्य वजहें सामने आ रही हैं:
राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव: इस साल नवंबर में उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें से 8 भाजपा के पास हैं, 1 सपा (रामगोपाल यादव) और 1 बसपा के पास है। इसके अलावा दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 में विधान परिषद (MLC) की 21 सीटें भी खाली हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इन उच्च सदन के चुनावों को विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कराकर अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रहे और विभिन्न जाति समूहों (विशेषकर ओबीसी और दलितों) को प्रतिनिधित्व देकर सपा के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को काटा जा सके।
जनगणना और प्रशासनिक पेच: उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, फरवरी 2027 में देश में जनगणना (पॉपुलेशन और जाति गणना) का दूसरा चरण निर्धारित है। यदि यूपी विधानसभा चुनाव भी तय समय यानी फरवरी 2027 में होते हैं, तो चुनाव और जनगणना दोनों के लिए एक ही सरकारी कर्मचारियों के पूल का उपयोग करना होगा, जिससे कर्मचारियों की भारी कमी हो सकती है। इसी वजह से कयास लगाए जा रहे हैं कि चुनाव जनवरी या उससे पहले भी कराए जा सकते हैं।
जल्द चुनाव पर चुनाव आयोग ने क्या कहा
चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें फिलहाल समय से पहले चुनाव को लेकर दिल्ली से कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है, लेकिन चुनावी मशीनरी हर स्थिति के लिए तैयार है। उधर, सपा नेता राजेंद्र चौधरी का कहना है कि पार्टी समय से पहले चुनाव के लिए भी पूरी तरह तैयार है और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का काम लगभग पूरा हो चुका है। वहीं, बसपा (BSP) सुप्रीमो मायावती ने भी अपने नेताओं को जनवरी में संभावित चुनावों को देखते हुए तैयारियां शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं।