उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था दिनोंदिन बदतर हो रही है। गोंडा में 45 वर्षीय बर्तन व्यापारी विनोद कुमार सहनी की मौत के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया है। सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हुए कथित विवाद के बाद व्यापारी पर हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल विनोद सहनी की इलाज के दौरान लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में मौत हो गई। घटना के विरोध में उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने KGMU के पोस्टमार्टम हाउस में धरना दिया। उनके साथ समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी धरने में हिस्सा लिया। मंत्री ने आरोप लगाया कि उनकी भी नहीं सुनी जा रही। मंत्री निषाद आज शुक्रवार को गोंडा पहुंचे तो सर्किट हाउस के चारों तरफ पुलिस तैनात कर दी गई। मंत्री ने इस पर आपत्ति भी की। 
घटना के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने और तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी दी है। पुलिस के मुताबिक मामले में पारसपुर थाना प्रभारी (SHO), शाहपुर पुलिस चौकी प्रभारी और एक कांस्टेबल को कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। लेकिन इन पुलिसवालों पर तभी कार्रवाई हुई, जब मंत्री का प्रदर्शन हुआ और वो गोंडा जा पहुंचे।

दुकान बंद कर घर लौट रहे थे विनोद सहनी

पुलिस के मुताबिक विनोद कुमार सहनी गोंडा के पारसपुर थाना क्षेत्र के रेक्सड़िया गांव के रहने वाले थे और स्थानीय बाजार में बर्तन की दुकान चलाते थे। बुधवार शाम दुकान बंद करने के बाद वह बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान कथित तौर पर चार मोटरसाइकिलों पर सवार करीब 10 लोगों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया और हमला कर दिया। अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिम) राधेश्याम राय के मुताबिक हमलावरों ने सहनी पर विभिन्न हथियारों से हमला किया और उन्हें सड़क पर गंभीर रूप से घायल छोड़ दिया। पुलिस के अनुसार हमलावर यह समझकर वहां से चले गए कि सहनी की मौत हो चुकी है। घायल सहनी को पहले स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें गोंडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए लखनऊ स्थित KGMU भेजा गया। गुरुवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर मंत्री संजय निषाद केजीएमसी पहुंचे और वहां धरने पर बैठ गए। इसके बाद सपा के नेता-कार्यकर्ता भी उन्हीं के साथ धरने पर बैठ गये।
ताज़ा ख़बरें

सोशल मीडिया पोस्ट और ओबीसी बनाम सवर्ण

पुलिस की शुरुआती जांच में हमले के पीछे सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद सामने आया है। गोंडा के पुलिस अधीक्षक अभिषेक के अनुसार सहनी ने कथित तौर पर हिंदू देवी-देवताओं और संतों के खिलाफ कुछ संदेश सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे, जिससे कुछ स्थानीय लोग नाराज थे। पुलिस के अनुसार इसी विवाद के बाद कुछ लोगों ने उन्हें निशाना बनाया। पुलिस ने यह भी कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान उन्होंने सहनी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नाराजगी की बात बताई। हालांकि, सोशल मीडिया पोस्ट की वास्तविक सामग्री और उसके संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
पुलिस ने विनोद सहनी की हत्या के मामले में तीन संदिग्धों - शुभम सिंह, आकाश सिंह और सुभाष सिंह को गिरफ्तार किया है। परिवार आरोपियों के खिलाफ मुठभेड़ और बुलडोजर कार्रवाई की मांग कर रहा है।

पुलिस ने तथ्य दो बार अलग-अलग बताये

मामले में हमले के तरीके को लेकर भी अलग-अलग जानकारी सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों में धारदार हथियार और भाले जैसे हथियारों से हमला किए जाने की बात सामने आई थी। वहीं बाद में गोंडा पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि विनोद सहनी के शरीर पर गोली या धारदार हथियार से चोट के निशान नहीं मिले हैं और मौत गंभीर चोटों के कारण हुई। पुलिस के मुताबिक उन्हें लाठियों से बुरी तरह पीटा गया था। इस तरह हमले में इस्तेमाल हथियारों को लेकर पुलिस की बाद की जानकारी और शुरुआती विवरणों में अंतर है। 10 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज है, लेकिन तीन गिरफ्तार किये गये। मौत के बाद एफआईआर में हत्या की धारा जोड़ी गई।

योगी के मंत्री संजय निषाद को गुस्सा क्यों आया

गोंडा पुलिस ने इस मामले में शुरू से लापरवाही बरती। निषाद पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद KGMU पहुंचे। उन्होंने मृतक के परिवार से मुलाकात की और पोस्टमार्टम हाउस में उनके साथ धरने पर बैठ गए। निषाद ने स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पारसपुर SHO, शाहपुर चौकी प्रभारी और संबंधित पुलिसकर्मियों को हटाने की मांग की। संजय निषाद ने सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को सुरक्षा तथा सरकारी नौकरी देने की मांग भी रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपियों और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो गोंडा में पुलिस अधीक्षक के कार्यालय और आवास के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। निषाद ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती और मामले में तत्काल न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए मुठभेड़ और अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने जैसी कार्रवाई की भी बात कही।

गोंडा पहुंचकर मंत्री फिर भड़के

विनोद सहनी के शव का पोस्टमॉर्टम होने के बाद आज डेड बॉडी गोंडा ले जाई गई। शव के साथ साथ मंत्री संजय निषाद गोंडा सर्किट हाउस पहुंचे। पुलिस ने पूरे सर्किट हाउस को चारों तरफ से घेर रखा था, ताकि स्थानीय लोग और निषाद समाज के लोग वहां नहीं पहुंच सकें। इस पर मंत्री भड़क गये। उन्होंने कहा कि "अरे इतना फोर्स क्यों लगा दिए हो यहाँ पे? पूरे सर्किट हाउस को चारों तरफ से घेर लिए हो। ये सरकार की छवि खराब कर रहे हो आप लोग। इतना फोर्स लगा के क्या दिखाना चाहते हो?" संजय निषाद गोंडा के SP अभिषेक पर भी भड़के। वो फूल लेकर मंत्री का स्वागत करने पहुंचे थे।

सपा भी मंत्री के धरने में शामिल हुई

इस घटना का सबसे म महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू यह रहा कि बीजेपी की सहयोगी निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद के धरने में समाजवादी पार्टी के नेता भी शामिल हो गए। सपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप धरने में संजय निषाद के साथ बैठे और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार में शामिल एक कैबिनेट मंत्री को भी अपनी बात रखने के लिए धरने पर बैठना पड़े तो इससे प्रशासन की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। वीआईपी पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने भी KGMU पहुंचकर पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग की।

अखिलेश यादव का ट्वीट और न्यायिक जांच की मांग

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी विनोद सहनी की मौत पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में सहनी को बर्तन व्यापारी और सपा से जुड़ा हुआ बताया तथा उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार पर अपराध और अराजकता बढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार पर पुलिस व्यवस्था को कमजोर और भ्रष्ट करने का भी आरोप लगाया। हालांकि, मृतक की राजनीतिक संबद्धता को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक संजय निषाद ने उन्हें निषाद पार्टी का कार्यकर्ता बताया, जबकि अखिलेश यादव ने उन्हें सपा से जुड़ा बताया।

राजनीतिक टकराव की आशंका

विनोद साहनी की मौत ने एक स्थानीय आपराधिक घटना को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। एक तरफ पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े विवाद को हमले का संभावित कारण बता रही है, वहीं मंत्री संजय निषाद पुलिस की कार्यप्रणाली और कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने भी मामले को कानून-व्यवस्था और निषाद समुदाय से जुड़े मुद्दे के रूप में उठाया है। संजय निषाद ने आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। पुलिस का कहना है कि मामले में गिरफ्तारियां की जा रही हैं और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। अब जांच का मुख्य फोकस हमले की पूरी वजह, सभी आरोपियों की भूमिका और पुलिस की कथित लापरवाही पर है।

मंत्री संजय निषाद ने ट्वीट में क्या कहा था

योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने सोशल मीडिया पर लिखा- हमारे निषाद समाज के क्रांतिकारी युवा साथी विनोद निषाद के साथ कल जिस प्रकार सामंतवादी मानसिकता रखने वाले लोगों द्वारा गोली एवं चाकुओं से जानलेवा हमला किया गया और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई, वह अत्यंत दुखद, पीड़ादायक और हृदयविदारक घटना है। मैं इस जघन्य घटना की कड़ी निंदा करता हूँ और किसी भी कीमत पर इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मैं गोंडा पुलिस प्रशासन को स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूँ कि आज रात तक सभी आरोपियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उनकी तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए साथ ही परिजनों के बयान के मुताबिक थाना अध्यक्ष परसपुर एवं चौकी इंचार्ज शाहपुर समेत समस्त स्टाफ को बर्खास्त किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो *कल दिनांक 11 सितम्बर 2026 को मैं पुलिस कप्तान गोंडा के आवास और कार्यालय का घेराव करने के लिए स्वयं गोंडा पहुँचूँगा।* विनोद निषाद को न्याय दिलाने के लिए हम हर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
*दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।*