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प्रतीकात्मक तस्वीर।

हापुड़ लिंचिंग केस में 10 दोषियों को आजीवन कारावास 

हापुड़ लिंचिंग के आरोपी आख़िरकार दोषी ठहरा दिए गए। दस दोषियों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है और जुर्माना भी लगाया है। 2018 में गोहत्या के शक में दोषियों ने मदापुर निवासी कासिम को पीट-पीट कर मार डाला था, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था।

उत्तर प्रदेश की एक सत्र अदालत ने गोहत्या की झूठी अफवाह पर 45 वर्षीय कासिम की हत्या और 62 वर्षीय समीउद्दीन पर हमले से संबंधित 2018 के हापुड़ लिंचिंग मामले में मंगलवार को दस लोगों को दोषी पाया।

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लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हापुड़ की अदालत ने सभी 10 दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/149, 307/149, 147, 148 और 153ए के तहत दोषी ठहराया। उन्हें आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 58000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

घटना जून 2018 में हुई थी। कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में पीड़ित को जमीन पर घसीटते हुए दिखाने वाली तस्वीरें वायरल होने के बाद, उत्तर प्रदेश पुलिस ने ट्विटर पर माफी मांगते हुए कहा था, 'हापुड़ की घटना के लिए हमें खेद है' और जांच की जाएगी। इसमें शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।

जीवित बचे पीड़ित समीउद्दीन ने 2018 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उचित जांच की मांग की थी। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक को मॉब लिंचिंग और घृणा अपराधों से संबंधित तहसीन पूनावाला फैसले में जारी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए जांच की निगरानी करने का निर्देश दिया था।
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अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित पक्ष ने निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि गोकशी की अफवाह को लेकर उनके भाई समीउद्दीन और कासिम की कुछ लोगों ने जमकर पिटाई की थी। इसके चलते ही कासिम की मौत हो गई और समीउद्दीन घायल हो गया था। 

पीड़ितों ने दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग नहीं की और कहा कि उन्हें आरोपियों से कोई दुश्मनी नहीं है और वे केवल न्याय चाहते हैं। शिकायतकर्ता और पीड़ितों का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर, सौतिक बनर्जी, देविका तुलसियानी, हाजी यूसुफ कुरेशी (दिवंगत) और मोहम्मद फुरकान कुरेशी.ने किया। 

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क़मर वहीद नक़वी
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