कथित बीजेपी पार्षद की नाव में चिकन-शराब पार्टी मामले में जमानत के लिए मुख्य रूप से आरोपियों के आपराधिक इतिहास न होने और जांच में सहयोग को आधार बनाया गया। जबकि इफ्तार वाले मामले में बेल नहीं देने के लिए मामले की गंभीरता पर जोर दिया था।
चिकन-शराब पार्टी के आरोपियों के साथ पुलिस (X/@premkumarcbn01)
गंगा नदी में नाव पर पार्टी करने के दो अलग-अलग मामलों में आरोपियों को जमानत देने के अलग-अलग मानदंड पर बहस तेज है। कथित तौर पर बीजेपी पार्षद की नाव पर चिकन और शराब की पार्टी करने वाले पांच आरोपियों को महज 24 घंटे के अंदर जमानत मिल गई। वहीं, मार्च 2026 में नाव पर इफ्तार पार्टी और बिरयानी खाने के मामले में 14 मुस्लिम युवकों को दो महीने जेल में रहना पड़ा था। उनकी जमानत निचली अदालतों ने पहले खारिज कर दी थी, बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी।
चिकन-शराब पार्टी का मामला
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें गंगा नदी में नाव पर कुछ लोग चिकन बना रहे थे और शराब पी रहे थे। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार वीडियो के साथ वायरल संदेश में दावा किया गया कि बीजेपी के मनोनित पार्षद अगस्तकुंडा क्षेत्र के सत्यनारायण साहनी उर्फ तन्ना की नाव पर पवित्र गंगा की लहरों पर न केवल मांस पकाया जा रहा है, बल्कि शराब पार्टी चल रही है। हालाँकि, पार्षद की नाव होने की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि पार्षद खुद नाव पर मौजूद नहीं थे और नाव किसकी है, इसको पुष्ट करने के लिए जांच चल रही है। इस वीडियो के आधार पर वाराणसी के दशाश्वमेध थाने में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने दीपक कुमार, अजय साहनी, अरुण कुमार साहनी, अनुराग निषाद और राहुल साहनी नाम के पांच लोगों को गिरफ्तार किया। रिपोर्टों में कहा गया कि ये सभी रामनगर क्षेत्र के रहने वाले हैं और नाव चलाकर अपना गुजारा करते हैं। गिरफ्तारी के अगले दिन बुधवार को इन्हें कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सभी को 20-20 हजार रुपये की दो जमानतें और मुचलका भरने पर रिहा कर दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वाराणसी की एसीजेएम अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि आरोपियों का आपराधिक इतिहास नहीं है, वे जांच में सहयोग कर रहे हैं और जमानत पर रिहा होने से साक्ष्यों से छेड़छाड़ या फरार होने की आशंका नहीं है।
पुलिस ने उनकी नाव भी जब्त कर ली है। ईटीवी की रिपोर्ट के अनुसार एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि वीडियो लगभग 6 महीने पुराना है। आरोपी खुद वीडियो बना रहे थे और एक-दूसरे का परिचय भी दे रहे थे। सोशल मीडिया पर इस मामले की तुलना तीन महीने पहले आए इफ्तार पार्टी के मामले से की जा रही है।
इफ्तार पार्टी का मामला
मार्च 2026 में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी करने और बिरयानी खाने के आरोप में 14 मुस्लिम युवकों को 17 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। 23 मार्च को वाराणसी की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। तब न्यायालय ने अभियोजन और अभियुक्त पक्ष की दलील सुनने के बाद अपने आदेश में उल्लेख किया कि अभियुक्तों के ख़िलाफ़ प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप स्थापित होते हैं और विवेचना की वर्तमान स्थिति को देखते हुए ज़मानत का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता।
जमानत के लिए हाई कोर्ट जाना पड़ा
इसके बाद 1 अप्रैल को सेशन कोर्ट ने भी जमानत देने से मना कर दिया था। लगभग दो महीने जेल में रहने के बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुँचा था। 15 मई 2026 को हाईकोर्ट ने 8 आरोपियों को जमानत दी। 19 मई को बाकी 6 को भी जमानत मिल गई। तब कोर्ट ने कहा कि जब पहले 8 लोगों को जमानत मिल चुकी है तो बाकी को भी समान आधार पर राहत मिलनी चाहिए।इस मामले में कोतवाली थाने में बीजेपी युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत पर FIR दर्ज की गई थी। आरोपियों पर धार्मिक भावनाएं आहत करने, गंगा जल प्रदूषित करने और अन्य धाराओं (बीएनएस की 298, 299, 196, 279, 223 आदि और आईटी एक्ट की धारा 67) के तहत केस दर्ज किया गया था।
दोनों मामलों में अंतर
चिकेन-शराब पार्टी में गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर निचली अदालत से जमानत मिली। इफ्तार पार्टी में निचली अदालतों ने जमानत खारिज की, दो महीने जेल के बाद हाईकोर्ट से जमानत हुई। दोनों घटनाएं गंगा नदी में नाव पर हुईं और दोनों में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगे। पुलिस ने दोनों मामलों में वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की। दोनों मामलों की जांच अलग-अलग चल रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि दोनों घटनाओं में गंगा नदी को पवित्र मानने वाले लोगों की भावनाएं आहत होने का मुद्दा उठा है।