नोएडा में 13 अप्रैल को हिंसा भड़क उठी। कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। दिल्ली पुलिस ने हाई एलर्ट जारी किया है। तमाम कारखानों के श्रमिकों ने तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन घोषित किया था। जिसमें वे अधिक वेतन की मांग कर रहे हैं। आंदोलन फैल सकता है।
नोएडा में मज़दूर आंदोलन के दौरान हिंसा
नोएडा में सोमवार को मजदूर यूनियन के तीन दिन से चल रहे वेतन वृद्धि के प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शनकारी मजदूरों ने सड़कें जाम कर दीं, जिससे दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर भारी ट्रैफिक जाम लग गया। पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। इसके बाद हिंसा शुरू हो गई। इससे दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ। इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक नोएडा से दिल्ली जाने वाले कई रास्ते बंद हैं। प्रदर्शनकारी कई सड़कों पर बैठ गए थे। डीएम मेधा रूपम सिर्फ बैठकें करती रहीं लेकिन आंदोलनकारी मज़दूरों को समझाने की कोशिश नहीं की गई।
नोएडा फेज-2 इलाके में आंदोलन का व्यापक प्रभाव दिखाई दिया। खासकर सेक्टर 1 और 84 में। सेक्टर 59 और 60 में आंदोलनरत मजदूरों ने कथित तौर पर दो वाहनों के शीशे तोड़ दिए और दो मोटरसाइकिलों में आग लगा दी। फैक्ट्री क्लस्टर में तनाव तेजी से फैला और सेक्टर 59 की कई फैक्टरियां बंद करनी पड़ीं क्योंकि ज्यादातर मजदूर प्रदर्शन में शामिल हो गए।
सड़कों पर बड़ी संख्या में मजदूर उतर आए, नारे लगाए और प्रमुख सड़कों को जाम कर दिया। पुलिस ने फ्लैशपॉइंट पर बल प्रयोग कर भीड़ को खदेड़ा, साथ ही स्थिति को शांत करने के प्रयास जारी रखे। अधिकारियों ने बताया कि टीमों को मैदान में भेजा गया है और मजदूरों से बातचीत कर आगे हिंसा को रोकने की कोशिश की जा रही है। हालांकि स्थिति पुलिस की वजह से बेकाबू हुई। अगर पुलिस बल प्रयोग नहीं करती तो मजजूर बेकाबू नहीं होते।
एक दिन पहले ही डीएम मेधा रूपम ने मजदूरों की वेतन वृद्धि की मांगों पर चर्चा करने का आश्वासन दिया था। लेकिन प्रशासन ने आगे कोई एक्शन नहीं लिया। प्रशासन कारखाना मालिकों से ठोस आश्वासन दिला पाने में कोई रूचि नहीं ले रहा था। मजदूर इस बात पर खासे नाराज़ हैं कि उनके वेतन में 200 रुपये की बढ़ोतरी की गई लेकिन कुछ कंपनियां इवेंट पर भारी खर्चा कर रही है, राजनीतिक दलों को चंदा दे रही हैं। इसकी आड़ में मज़दूरों का शोषण किया जा रहा है।
हालात बिगड़ने के बाद गौतम बुद्ध नगर की जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम ने शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और मजदूरों की सुविधा के लिए एक कंट्रोल रूम स्थापित करने की घोषणा की है। डीएम ने आश्वासन दिया कि सभी शिकायतों का तुरंत समाधान किया जाएगा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गौतम बुद्ध नगर कमिश्नरेट के अंतर्गत आने वाले सभी औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। वरिष्ठ अधिकारी घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं।स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है।
प्रदर्शन के कारण दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। पीक ऑफिस आवर्स में डीएनडी फ्लाईवे समेत प्रमुख मार्गों पर किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं। अन्य शहरों से नोएडा आकर जॉब या कारोबार करने वाले लोग घंटों फंस गए।
दिल्ली और नोएडा पुलिस की बड़ी तैनाती की गई और ट्रैफिक को डायवर्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन वाहनों की भारी भीड़ के कारण देरी बढ़ती गई। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर कहा कि मजदूरों के प्रदर्शन के कारण नोएडा की ओर ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ है। एडवाइजरी में बताया गया कि चिल्ला बॉर्डर के पास नोएडा लिंक रोड को प्रदर्शनकारियों ने पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है, जिससे दिल्ली से नोएडा आने वाले ट्रैफिक पर गंभीर असर पड़ा है।
प्रदर्शन के बाद नोएडा अथॉरिटी में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई जिसमें शांति बहाल करने पर चर्चा की गई। बैठक में मजदूरों के हितों की रक्षा, ओवरटाइम पर डबल वेतन, बोनस का भुगतान, साप्ताहिक छुट्टी और कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था सुधारने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
आंदोलन अन्य शहरों में फैलने का खतरा
वेतन बढ़ोतरी को लेकर मज़दूर आंदोलन फरीदाबाद, गुड़गांव, सोनीपत, बहादुरगढ़ औद्योगिक क्षेत्रों में फैल सकता है। फरीदाबाद में मजदूर यूनियन लगातार छोटे-छोट प्रदर्शन के जरिए इस मुद्दे को उठा रही हैं। गुड़गांव के धारूहेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में एक महीने से मज़दूर यूनियन आंदोलनरत हैं। यूपी और हरियाणा में बीजेपी शासित सरकारें हैं। मज़दूर यूनियनों का आरोप है कि उनके आंदोलन को पुलिस के ज़रिए दबाया जा रहा है।
मज़दूरों के आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश
नोएडा में सोमवार को हुई घटना के साथ ही नोएडा के कुछ चैनल मज़दूर आंदोलन को बदनाम करने में जुट गए हैं। चीखने-चिल्लाने के लिए मशहूर एक चैनल ने रिपोर्ट चलाई है कि यूपी में सुनियोजित हिंसा भड़काने की साजिश चल रही है। उसने नोएडा के मज़दूर आंदोलन को भी उसी से जोड़ा। उसकी रिपोर्ट के मुताबिक यूपी एटीएस ने कुछ लोगों को पकड़ा है, जिन्होंने इस आरोप को कबूल भी किया है। फिर उसी चैनल ने अपनी रिपोर्ट में डिसक्लेमर लगाते हुए लिखा है- एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, उत्तर प्रदेश पुलिस हिंसा भड़काने में विदेशी तत्वों की संभावित भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक इस जानकारी को नोएडा हिंसा से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा है, लेकिन रणनीति में समानता के कारण जांच तेज हो गई है।