loader

क़िला बचाने उतरे योगी, गोरक्षनाथ मठ में डाला डेरा

पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपने मज़बूत क़िले गोरखपुर को बचाने के लिए योगी आदित्यनाथ ने सब कुछ दाँव पर लगा दिया है। सोमवार से चुनाव तक योगी हर रात गोरक्षनाथ मठ में गुजारेंगे। अगले पाँच दिन में 19 जनसभाएँ, कार्यकर्ताओं की एक दर्जन बैठकें लेंगे और हर एक पेंच सुलझाएँगे। फूट कर बिखर चुकी अपनी सेना हिन्दू युवा वाहिनी को फिर से संजो कर योगी ने गोरखपुर का क़िला बचाने में लगा दिया है।

ताज़ा ख़बरें

दरअसल, उप-चुनाव में झटका खा चुके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बार गोरखपुर में कोई मौक़ा छोड़ना नहीं चाहते हैं। उत्तर प्रदेश में सातवें और आख़िरी चरण में जिन लोकसभा सीटों पर 19 मई को मतदान होना है उनमें योगी का अपना क़िला गोरखपुर शामिल है। एक उप-चुनाव हार जाने के बाद योगी का यह क़िला उतना महफ़ूज़ नहीं माना जा रहा है। ऊपर से बीजेपी प्रत्याशी को लेकर असंतोष ने और भी परेशानी पैदा कर दी है। शायद इन्हीं सबको ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने अब पूरा एक हफ़्ता वहीं गुज़ारने का फ़ैसला किया है। इस हफ़्ते योगी गोरखपुर और आसपास के इलाक़े में ही 19 जनसभाओं को संबोधित करेंगे, जबकि कार्यकर्ताओं के साथ एक दर्जन बैठकें करेंगे। प्रदेश बीजेपी नेताओं का कहना है कि सोमवार से लेकर मतदान तक योगी गोरखपुर में अपने मठ गोरक्षनाथ पीठ में ही हर रात गुज़ारेंगे और इस दौरान रोज सभाएँ, बैठक और प्रचार करेंगे।

अंतिम चरण में गोरखपुर मंडल के तहत आने वाली सभी छह लोकसभा सीटों पर मतदान होगा। ये सीटें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव वाली जानी जाती हैं। पिछले लोकसभा चुनावों में इन सभी सीटों पर बीजेपी ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी। 

सातवें चरण में 19 मई को गोरखपुर मंडल में गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर, सलेमपुर, बाँसगाँव और देवरिया सीटों पर मतदान होना है। इसके अलावा इसी दिन वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर, बलिया और घोसी की सीटों पर भी वोट डाले जाएँगे।

उप-चुनावों से सबक़ मिलने के बाद ख़ुद संभाली कमान

क़रीब एक साल पहले गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उप-चुनावों में मिली हार के बाद अब योगी का ख़ास ध्यान अपनी सीट पर है। पिछले साल हुए उप-चुनावों में बीजेपी प्रत्याशी उपेंद्र शुक्ला को इस सीट पर सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद के हाथों मात मिली थी। बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ख़ुद इस सीट को खाली किया था और यहाँ से उनकी और गोरक्षनाथ मठ की प्रतिष्ठा जुड़ी थी। इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस सीट पर योगी के पसंद के उम्मीदवार भोजपुरी स्टार रविकिशन शुक्ला को खड़ा किया है। बीते एक पखवाड़े में योगी गोरखपुर में दो दर्जन सभाएँ कर चुके हैं और ख़ुद ही रविकिशन शुक्ला को चुनाव प्रचार अभियान की कमान संभाल ली है।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि योगी अंतिम चरण के चुनाव प्रचार की देखरेख गोरक्षनाथ मठ में रहते हुए ही करेंगे। बंगाल और बिहार की बची हुई सीटों पर भी चुनाव प्रचार करने योगी गोरखपुर से ही जाएँगे।

उत्तर प्रदेश से और ख़बरें

योगी की ही हिन्दू युवा वाहिनी बनी है चुनौती

गोरखपुर में योगी के लिए एक और चुनौती ख़ुद उनके बनाए संगठन हिन्दू युवा वाहिनी के लोग भी हैं। कभी बीजेपी के समानांतर योगी ने वाहिनी का गठन किया था। योगी के ख़ास और हिन्दू युवा वाहिनी के पूर्व में अध्यक्ष रहे सुनील सिंह अब बाग़ी हो चुके हैं और गोरखपुर में अपने समर्थकों के साथ बीजेपी के ख़िलाफ़ गठबंधन प्रत्याशी का प्रचार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने वाहिनी को भंग कर दिया था और सभी पदाधिकारियों को हटा दिया था। सुनील सिंह ने ख़ुद भी गोरखपुर से नामांकन दाखिल किया था। तकनीकी कारणों से उनका नामांकन रद्द हो गया है और अब वह मुख्यमंत्री योगी को इसका दोषी बताते घूम रहे हैं। हिन्दू युवा वाहिनी का अध्यक्ष रहते योगी से बग़ावत करने पर सुनील सिंह पर कई मुक़दमे लगाकर उन्हें आठ महीने जेल में रखा गया था। आज सुनील पूरे पूर्वांचल में घूम-घूम कर ख़ुद पर हुए अत्याचार की कहानी सुना रहे हैं और सपा-बसपा गठबंधन को जिताने की अपील कर रहे हैं।

गोरखपुर चुनाव में वाहिनी का महत्व जानते हुए योगी ने फिर से इस संगठन को पुनर्जीवित करते हुए उसे काम पर लगा दिया है। योगी ने वाहिनी की कमान अब अपने ख़ास पी.के. मल्ल को सौंप दी है और कई बार इसके कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर उन्हें बीजेपी प्रत्याशी रविकिशन के लिए जुटा दिया है।

निषाद वोटों को साधने के लिए प्रवीण निषाद को लगाया

गोरखपुर में बीजेपी की जीत में सबसे बड़ा रोड़ा बड़ी तादाद में यहाँ केवट बिरादरी के वोटों की मौजूदगी है। गठबंधन ने इस बिरादरी के मज़बूत प्रत्याशी रामभुवाल निषाद को खड़ा किया है जो मुसलिम, दलित और यादव वोटों के साथ कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं।

बीते साल हुए उप-चुनावों में बीजेपी को हराने वाले प्रवीण निषाद को पार्टी में शामिल कर योगी ने गोरखपुर की पड़ोस की सीट संतकबीरनगर से टिकट दिया है। संतकबीरनगर में रविवार को मतदान ख़त्म हो जाने के बाद प्रवीण निषाद को भी गोरखपुर में प्रचार में लगा दिया गया है। गोरखपुर में गठबंधन प्रत्याशी रामभुवाल निषाद की पकड़ सजातीय वोटों पर कमज़ोर करने के सासंद प्रवीण निषाद का उपयोग किया जा रहा है। हालाँकि इसके मुक़ाबले के लिए सपा ने इसी इलाक़े के बड़े केवट नेता जमुना निषाद और राजमति निषाद को अपने पाले में लाने में सफलता पायी है।

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता प्रमाणपत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
कुमार तथागत
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

उत्तर प्रदेश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें