अंकिता भंडारी हत्याकांड में नए खुलासों के बाद उत्तराखंड में आक्रोश का माहौल है। 7 जनवरी को पूर्व सैनिकों ने रैली निकाली, 11 जनवरी को बंद का आह्वान किया गया है। पीड़िता के पिता ने समर्थन की अपील की है। बीजेपी पूरी तरह बचाव की मुद्रा में आ गई है।
उत्तराखंड में 7 जनवरी को पूर्व सैनिकों ने अंकिता भंडारी को इंसाफ के लिए रैली
उत्तराखंड में 2022 का चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड लगातार तूल पकड़ रहा है। राज्य भर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जनता सीबीआई जांच की मांग कर रही है। पूर्व सैनिकों ने बुधवार 7 जनवरी को रैली निकालकर अपना विरोध जताया, जबकि अंकिता के पिता ने 11 जनवरी को प्रस्तावित उत्तराखंड बंद के लिए कारोबारियों से समर्थन की अपील की है। इस बीच, भाजपा सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वो अंकिता के माता-पिता से बात करेंगे। दिल्ली हाई कोर्ट ने भाजपा महासचिव दुष्यंत गौतम को राहत देते हुए उनसे जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से कहा है कि वो फौरन सारे ट्वीट और पोस्ट हटा लें।
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की निवासी थीं, जो ऋषिकेश के वनतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, जो एक पूर्व भाजपा नेता के बेटे हैं, और उनके सहयोगियों पर आरोप था कि उन्होंने अंकिता को ग्राहकों के लिए 'एक्स्ट्रा सर्विसेज' प्रदान करने के लिए दबाव डाला। अंकिता के मना करने पर 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई और शव को नहर में फेंक दिया गया। 24 सितंबर को शव बरामद हुआ। मामले की जांच में पुलिस ने तीन आरोपियों - पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया। मई 2025 में कोटद्वार कोर्ट ने इन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई, लेकिन रेप का आरोप साबित नहीं हुआ।
मामले में 'वीआईपी गेस्ट' का एंगल शुरू से विवादास्पद रहा है। पुलिस ने दावा किया कि कोई वीआईपी इस मामले में शामिल नहीं है, लेकिन दिसंबर 2025 में एक महिला उर्मिला सनावर (जो खुद को निष्कासित भाजपा नेता सुरेश राठौर की पत्नी बताती हैं) ने ऑडियो क्लिप्स जारी किए, जिसमें एक वरिष्ठ भाजपा नेता (जिसे 'गट्टू' या दुष्यंत गौतम से जोड़ा गया) को वीआईपी बताया गया। इसने मामले को फिर से जिंदा कर दिया, और जनता में आक्रोश फैल गया। पुलिस ने उर्मिला के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है।
बुधवार 7 जनवरी को पूर्व सैनिकों ने देहरादून सहित कई जिलों में रैली निकाली और अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राज्य पुलिस की जांच में कई खामियां हैं और वीआईपी को बचाने की कोशिश की जा रही है। खटीमा में स्थानीय लोगों ने विरोध मार्च निकाला, जहां हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। कैंडल मार्च और नारे लगाते हुए उन्होंने 'न्याय दो' की मांग की। नैनीताल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कैंडल मार्च निकाला, जबकि हल्द्वानी, मसूरी, रुद्रप्रयाग और हरिद्वार में भी प्रदर्शन हुए।
पूर्व सैनिकों का कहना है कि उत्तराखंड की जनता सीबीआई जांच से कम पर तैयार नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार पर राजनीतिक दबाव का आरोप है।
11 जनवरी को उत्तराखंड बंद
अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने एक वीडियो बयान जारी कर 11 जनवरी को प्रस्तावित उत्तराखंड बंद में कारोबारियों और आम जनता से समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की हत्या के पीछे बड़े लोग शामिल हैं और न्याय के लिए सीबीआई जांच जरूरी है। जन संगठनों, कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने बंद का आह्वान किया है। बंद के दौरान राज्य में सभी दुकानें, स्कूल और परिवहन बंद रहने की संभावना है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर सीबीआई जांच नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।
देहरादून में प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया, जिससे झड़प हुई।
भाजपा बचाव की मुद्रा में
भाजपा सरकार इस मामले में बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वे अंकिता के माता-पिता से बात करेंगे और उनकी मांग के अनुसार जांच कराई जाएगी। उन्होंने अंकिता को 'हमारी बेटी' बताते हुए कहा कि कोई दोषी नहीं बचेगा। हालांकि, इससे पहले धामी विपक्ष पर जनता को भड़काने का आरोप लगा चुके हैं। उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि सरकार हर जांच के लिए तैयार है, लेकिन कांग्रेस मुद्दाविहीन होकर राजनीति कर रही है। भाजपा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि अगर सबूत हैं तो जांच होगी, लेकिन विपक्ष भ्रम फैला रहा है। सीबीआई जांच की मांग पर धामी सरकार और भाजपा नेता चुप हैं।
कांग्रेस का सवाल
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एक्स पर सीएम धामी से सवाल किया- मैं धामी जी और पुलिस के अधिकारियों से पूछना चाहता हूँ वो सीधे सीधे सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं। हमारा स्पष्ट प्रश्न है डीजीपी और मुख्यमंत्री से कि बेटी अंकिता भण्डारी का पार्थिव शरीर निकालने के अगली रात को वनतरा रिसॉर्ट पर बुलडोजर किसने चलाया?
दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश: सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को अंकिता हत्याकांड से जोड़ने वाले सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना सबूत के किसी को बदनाम नहीं किया जा सकता। यह आदेश नए ऑडियो क्लिप्स के बाद आया, जहां गौतम का नाम लिया गया था। भाजपा ने इसे विपक्ष की साजिश बताया है। दुष्यंत गौतम का नाम वीआईपी के तौर पर आया था, जिसका उन्होंने खंडन किया था।
जनता का आक्रोश: महिलाओं की सुरक्षा का सवाल
यह मामला अब सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और राजनीतिक संरक्षण का मुद्दा बन गया है। प्रदर्शन में महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हैं, जो 'बेटी बचाओ' नारे को खोखला बता रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी दर्शन भारती ने कहा कि मामले की गंभीर जांच जरूरी है, वरना सरकार और पुलिस पर सवाल उठेंगे। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा अपराधियों को बचा रही है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक लाभ का खेल बता रही है।
उत्तराखंड में यह आंदोलन लगातार बढ़ रहा है, और 11 जनवरी का बंद निर्णायक साबित हो सकता है। जनता की मांग साफ है - सीबीआई जांच से कम कुछ नहीं चलेगा। क्या सरकार इस दबाव में झुकेगी, या मामला और उलझेगा? आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट होगी।