उत्तराखंड में कर्णप्रयाग में एक स्थानीय विवाद के बाद सात निहंग सिखों द्वारा नगरासू गुरुद्वारे पर क़ब्ज़ा कर लेने से क्षेत्र में तनाव है। निहंगों ने नगरासू गुरुद्वारे में हंगामा किया, गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और इसे अंदर से बंद कर लिया था। लेकिन रविवार को डीएम और एसपी की बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला और वे छत से उतरने को तैयार नहीं हैं। इस बीच, इंटरनेट बंद कर दिया गया है और आईटीबीपी के जवानों और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। गुरुद्वारा प्रबंधन का कहना है कि निहंगों ने एक 60 वर्षीय श्रद्धालु को अपने कब्जे में रखा हुआ है।

यह पूरा घटनाक्रम कैसे चला, यह जानने से पहले यह जान लीजिए कि पूरा विवाद क्या है और निहंगों की मांगें क्या हैं। दरअसल, यह विवाद 16 जून को कर्णप्रयाग में निहंग यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच हुए झगड़े से शुरू हुआ था। तब निहंग सिख कर्णप्रयाग के गुरुद्वारे में मत्था टेककर वपास जा रहे थे तो एक होटल के बाहर वाहन खड़ा करने को लेकर कुछ स्थानीय लोगों से विवाद हो गया था। इस दौरान निहंगों ने तलवार के हमले से चार लोगों को घायल कर दिया था। एक सिख श्रद्धालु भी चोटिल हुआ था।
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इस घटना के विरोध में कुछ निहंग सिखों ने प्रदर्शन आयोजित किया और इसमें शामिल होने और शिकायत दर्ज कराने में नगरासू गुरुद्वारे के प्रबंधकों से सहयोग की अपील की थी। जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार निहंग सिखों का आरोप है कि उस घटना में स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन ने उनके पक्ष में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई। इससे वे बेहद नाराज़ थे।

नगरासू गुरुद्वारे में तोड़फोड़ और हंगामा

इसी बीच, नगरासू गुरुद्वारे में सात निहंग सिख छत पर चढ़ गए। उन्होंने गुरुद्वारे का सोलर सिस्टम तोड़ दिया और पानी की सप्लाई भी रोक दी है। गुरुद्वारा प्रबंधन का आरोप है कि इन लोगों ने दो लोगों को अपने कब्जे में ले लिया था। एक युवक को प्रबंधन ने छुड़ा लिया है, लेकिन 60 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति अभी भी उनके कब्जे में है।

निहंगों की मांगें क्या?

गुरुद्वारे को कब्जे में लेने वाले निहंग सिखों की मांग है कि कर्णप्रयाग की घटना के लिए स्थानीय लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे एकतरफा बताया है। उन्होंने घटना वाले दिन गिरफ़्तार किए गए अपने 3 साथियों की रिहाई की मांग भी की है। इसके अलावा निहंग सिखों के खिलाफ चमोली पुलिस में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग भी की गई है।

गुरुद्वारा संचालक बेहंत सिंह का बयान

गुरुद्वारा संचालक बेहंत सिंह ने रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'हम इन लोगों (हंगामा करने वाले निहंगों) को नहीं जानते। पहले चार लोग दो बाइक पर आए, फिर तीन पैदल आए। उन्होंने सेवादारों से झगड़ा शुरू कर दिया। हमने उन्हें रोका तो अपशब्द कहने लगे। इनके साथ एक युवक भी है जो निहंग वेश में नहीं है, वो सबसे ज्यादा उत्तेजित था।' ईटीवी की रिपोर्ट के अनुसार बेहंत सिंह ने आगे बताया कि ये वही लोग हैं जो पहले ऋषिकेश गुरुद्वारे के सामने पुलिस से भिड़ चुके हैं, फिर धारी देवी में विवाद किया और अब यहां आकर तोड़फोड़ कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि छत पर चढ़े लोग किसी मान्यता प्राप्त निहंग संगठन या पंजीकृत समिति से जुड़े नहीं दिखते। प्रबंधन ने निहंगों को आश्वासन दिया है कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, फिर भी वे नीचे नहीं उतर रहे।

प्रशासन ने क्या किया?

गुरुद्वारे में छत पर चढ़े इन निहंगों से डीएम विशाल मिश्रा और एसपी नीहारिका तोमर दो बार बातचीत कर चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति भी लगातार वार्ता करने की कोशिश कर रही है। इलाके में ITBP की तैनाती के साथ सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कर्णप्रयाग में भी धारा 163 लगा दी गई है, जो 27 जून तक लागू रहेगी। चारधाम यात्रा मार्ग के पास होने के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है।
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सरकार का सख्त रुख

'कुमाऊँ जागरण' की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड के होम सेक्रेटरी शैलेश बगोली ने साफ चेतावनी दी है कि जो लोग इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप को पूरे मामले की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

विवाद निपटाने की कोशिश जारी

निहंग सिख अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जिनमें 16 जून को जेल भेजे गए तीन निहंगों की रिहाई भी शामिल है। प्रशासन शांतिपूर्ण तरीके से मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। चारधाम यात्रा के चलते यह पूरा इलाका संवेदनशील माना जा रहा है, इसलिए प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।