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भड़काऊ विडियो मामले में योगी सरकार चुप, संगठनों ने हमला बोला

योगी आदित्यनाथ के भड़काऊ विडियो पर सत्यहिंदी.कॉम की एक्सक्लूसिव ख़बर से उत्तर प्रदेश में काफ़ी हंगामा खड़ा हो गया है। योगी सरकार फ़िलहाल सकते में है और सरकार का कोई भी आदमी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। योगी आदित्यनाथ की पार्टी बीजेपी ने भी अपना मुँह सिल लिया है। लेकिन सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ झंडा बुलंद कर दिया है।
सत्यहिंदी.कॉम ने इंडिया टीवी के कार्यक्रम ‘आपकी अदालत’ में योगी आदित्यनाथ से किए गए सवाल-जवाब के हवाले से यह कहा था कि परवेज़ परवाज़ को जानबूझ कर एक साज़िश के तहत फँसाने की कोशिश की जा रही है जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के बड़े अधिकारी शामिल हैं। 
2007 में गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ ने एक भाषण में कहा था कि अगर कोई एक हिंदू की जान ले तो उसके बदले 10 मुसलमानों का क़त्ल कर देना चाहिए। इस मामले पर पत्रकार परवेज़ परवाज़ की शिकायत पर योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज़ हुआ था। योगी तब गोरखपुर से सांसद थे। 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद अब वे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। इस ख़बर के बाद राजनीतिक दल और मानवाधिकार संगठनों पीयूसीएल और रिहाई मंच ने आरोप लगाया कि भड़काऊ भाषण के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को क्लीन चिट दिलाने की कोशिश की जा रही है और एक बड़ी साज़िश के तहत परवेज़ परवाज़ को फँसाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता ओंकारनाथ सिंह ने कहा कि योगी पर भड़काऊ भाषण देने का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और ख़ुद मुख्यमंत्री ने पूर्व में एक्स्ट्रा-जूडिशल स्टेटमेंट देकर अपने भाषण को सही माना है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे में मुक़दमा दर्ज़ कराने वाले पत्रकार पर ही मामला दर्ज़ करना बदले की भावना से किया जाने वाला उत्पीड़न है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने अपने आका को ख़ुश करने के लिए इस तरह की कार्रवाई की है।पीयूसीएल, लखनऊ उपाध्यक्ष, आशीष अवस्थी का कहना है कि जबसे वर्तमान सरकार सत्ता में आई है, योगी के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज़ कराने वाले पत्रकार के ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी मुक़दमे दर्ज़ कराए जा रहे हैं और अब तो ख़ुद मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकार करने के बाद उनके भाषण की सीडी को छेड़छाड़ का शिकार बता उलटा शिकायतकर्ता को जेल भेजने की साज़िश रची गई है।

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता असद हयात और परवेज़ परवाज़ लंबे समय से क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। पिछले दिनों बलात्कार के झूठे आरोप में परवेज़ को क्लीन चिट तक मिल चुकी थी। उसी मामले में उनकी गिरफ़्तारी और अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामले में मुक़दमा दर्ज़ कराना साफ़ करता है कि सांप्रदायिक हिंसा के आरोपी योगी व उनका पूरा कुनबा ख़ुद को बचाने में लिए परवेज़ के ख़िलाफ़ राजनीतिक षड्यंत्र के तहत कार्रवाई करा रहा है। 

शुऐब ने बताया कि गोरखपुर सांप्रदायिक हिंसा के मामले में योगी के साथ सह-अभियुक्त और पूर्व विधान परिषद सदस्य वाई.डी. सिंह ने एक याचिका में आरोप लगाया कि परवेज़ ने 2007 दंगे की योगी के भाषण की जो सीडी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल की है, वह फ़र्ज़ी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वे एक साम्प्रदायिक व्यक्ति हैं जिन्होंने सद्दाम हुसैन की फाँसी का विरोध किया था और परवेज़ ने दंगा किया़, कई दुकानों में लूटपाट की, लेकिन उन्होंने एक भी ऐसी दुकान या दुकान मालिक का नाम नहीं बताया। बता दें कि 2015 में वाई.डी. सिंह की तरफ़ से परवेज़ के ख़िलाफ़ ऐसी ही एक याचिका गोरखपुर सीजेएम के सामने लगाई गई थी जिसे अदालत ने ख़ारिज़ कर दिया था। वहीं अगस्त 2014 में इंडिया टीवी पर आपकी अदालत कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने भड़काऊ वीडियो की सत्यता पर कोई सवाल करने के बजाय सार्वजनिक तौर पर उसमें ख़ुद के होने की गवाही पेश कर दी थी।

परवेज़ के वकील फ़रमान अहमद ने बताया कि योगी आदित्यनाथ के विडियो के मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने भी इंडिया टीवी के विडियो को साक्ष्य के रूप में संलग्न करने की उनकी दरख़ास्त खारिज करके सरकार के तर्क को मान लिया था जिसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार कर अगस्त 2018 में योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश सरकार को चार हफ़्ते में जवाब दाखिल करने का नोटिस दिया। इसका जवाब दाखिल करने की सूचना अब तक नहीं मिली है। 

सरकार ने कोर्ट को जवाब दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त 2018 को पारित आदेश में यूपी सरकार को 4 सप्ताह में जवाब दाख़िल करने का आदेश दिया था परंतु अभी तक सरकार ने जवाब दाख़िल नहीं किया है। इस मामले में तत्कालीन बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ, केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला, बीजेपी विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल, तत्कालीन मेयर और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अंजू चैधरी, पूर्व एमएलसी वाईडी सिंह के ख़िलाफ़ सांप्रदायिक हिंसा का मुक़दमा दर्ज़ हुआ था।

डीवीडी पर परवेज़ क्या बोले

परवेज़ का कहना है कि जिस डीवीडी को फ़रेंसिक जाँच के लिए भेजा गया उसे उन्होंने पुलिस को दी ही नहीं थी। विवेचक ने कोई फ़र्द ज़ब्ती नहीं तैयार की जिससे साबित हो कि विवादित डीवीडी परवेज ने पुलिस को सौंपी। उनका दावा है कि उनके द्वारा दी गई सीडी अदालत में शपथ पत्र के साथ दाख़िल हुई थी जो आज भी टूटी हुई दशा में निचली अदालत की फ़ाइल में मौजूद है। डीवीडी के प्राप्त होने और उसके बनने की तारीख़ों में दो महीने का अंतर पुलिस की जाँच प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।

परवेज़ पर क्या है मुक़दमा

65 वर्षीय परवेज़ और दूसरे सह अभियुक्त पर जून 2018 में सामूहिक बलात्कार का मुक़दमा दर्ज़ हुआ। पुलिस ने मामले की तफ़्तीश की और उसे फ़र्ज़ी पाया। आखिरकार मामले में फ़ाइनल रिपोर्ट लगा दी। जिस दिन हाई कोर्ट में सुनवाई होनी थी, उसी रात परवेज़ को गिरफ़्तार किया गया। इस मामले में हाई कोर्ट ने दूसरे अभियुक्त की गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी है। 

पुलिस धमका रही है : परवेज़ की पत्नी

परवेज़ परवाज़ की पत्नी रेहाना बेगम झूठे मामले में फँसाने और सुरक्षा के लिए मानवाधिकार आयोग, प्रमुख सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक गोरखपुर, आईजी गोरखपुर, डीआईजी गोरखपुर, एसएसपी गोरखपुर से गुहार लगा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर पुलिस उन्हें और उनके पुत्रों को धमका रही है और फ़र्ज़ी मुकद़मे में फँसाने का षड्यंत्र रच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कड़ी में परवेज के ख़िलाफ़ थाना राजघाट में मुक़दमा दर्ज़ करवाया गया। वह कहती हैं कि इसपर अंतिम रिपोर्ट लग जाने के बाद योगी आदित्यनाथ के इशारे पर पुनर्विवेचना का आदेश हुआ। परवेज़ के जेल जाने के बाद उनका परिवार इतना आतंकित है कि घर में रहने का साहस नहीं जुटा पा रहा। परवेज़ का एक बेटा विकलांग है, सुनने व बोलने से लाचार है।

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