प्री मानसून की पहली किश्त ने ही अयोध्या में चल रहे क़रीब बत्तीस हज़ार करोड़ रुपए के विकास कार्यों और राम मंदिर निर्माण की कलई खोल दी । रामलला पर पानी टपक रहा है और रामपथ पर गड्ढे ही गड्ढे दिखाई दे रहे हैं । साधु संत और प्रशासन एक दूसरे को भ्रष्टाचारी और गुंडा मवाली बता रहे हैं
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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