यूरोप में एक वीडियो वायरल है जो इटली के पीएम को संबोधित है, भाषा इटैलियन है और उसमें कहा गया है कि यदि यही हाल रहा तो क्रांति होने से कोई रोक नहीं सकता! हो सकता है कि यह फ़्रस्ट्रेशन हो पर अभी हाल में पूरी हुई पिछली सदी में मज़दूरों ने ऐसा कर दिखाया है। भारत में भी मज़दूर सड़कों पर बिखर गए हैं, दुनिया चकित है कि लाखों लाख लोगों ने सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने का फ़ैसला किया है। शीतल पी सिंह ने इस परिस्थिति के संकेत और प्रतिफल पर बात की है।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।

























