दिल्ली में हर तीसरे महीने सफ़ाई कर्मचारी हड़ताल पर चले जाते हैं। पूरी दिल्ली में कूड़े के ढेर लग जाते हैं। मामला हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट पहुँचता है तब जाकर कूड़े के ढेर हटते हैं। एमसीडी और केजरीवाल सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप मीडिया की ख़बर बनते हैं। इतने गंभीर मुद्दे पर इस चुनाव में कोई बात न हो सकी। 'दिल्ली किसकी' में देखिए शीतल पी सिंह का विश्लेषण।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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