दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र कहे जाने से हम गौरवान्वित महसूस तो करते हैं, लेकिन दिल्ली दंगे ने दुनिया भर में भारत की कैसी छवि गई? भारत की धर्मनिरपेक्षता कहाँ गई? बीजेपी सरकार की इस दंगे पर जैसी प्रतिक्रिया रही, क्या ऐसे भारत को विश्वगुरु बनाएँगे? देखिए शीतल के सवाल में पूर्व डीजीपी विभूति नारायण राय के साथ चर्चा।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।

























