“डिस्टोपिया”,मनुष्य के ऐसे दु:स्वप्न जो महामारियों युद्धों और विषाद से जन्मते हैं ।जिनके प्रभाव से दानिश्वर भविष्य के ऐसे देश समाज की कल्पना करते हैं जो आपके मनमष्तिष्क को अवसाद से भर सकती है ! जार्ज आरवेल का “1984”और जोस सरामागो के “द ब्लाइंडनेस”को लोग आजकल क्यों ढूँढकर पढ़ रहे हैं ? राजू शर्मा (Rtd IAS)से शीतल पी सिंह ने पूछा
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।







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