देश की केंद्रीय और राज्यों की सेवाओं में IAS, IPS चुने जाने के बाद सेवारत रह चुके और अब सेवानिवृत्त हुए अफ़सरों ने आंदोलन कर रहे किसानों को खालिस्तानी कहने पर लिखित आपत्ति जताई है। सैकड़ों हस्ताक्षरों से युक्त पत्र जारी करके उन्होंने इस संबंध में लाये गये तीनों क़ानूनों में प्रक्रियात्मक दोष गिनाए हैं । इन्हीं में से एक हस्ताक्षरकर्ता IAS राजू शर्मा से शीतल पी सिंह ने बातचीत की।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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