कुल ६४ बरस पूरे कर सके अमर सिंह । सिंगापुर के एक अस्पताल में उन्होंने आख़िरी साँस ली । उन्होंने राजनीति में मर्यादा नामक शब्द को अप्रासंगिक कर दिया । वे सफलता के लिये कुछ भी कर सकते थे । क्लिंटन तक को वे अपनी खाने की मेज़ पर मेहमान रख कर दिखा चुके थे पर आख़िरी वर्षों में अस्वस्थता ने उनकी चमक फीकी कर दी थी ।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।







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