कल मैं किसानों के जमावड़े के बीच था। घंटों रहा। वे वहाँ लाखों की तादाद में आ-जा रहे हैं। हज़ारों वहाँ अनवरत जमे हैं। किसी पंजाबी देहाती मेले जैसा दृश्य है। ये किराये पर ला सकने वाले लोग नहीं हैं! शीतल पी सिंह की आँखों देखी।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।












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