कल मैं किसानों के जमावड़े के बीच था। घंटों रहा। वे वहाँ लाखों की तादाद में आ-जा रहे हैं। हज़ारों वहाँ अनवरत जमे हैं। किसी पंजाबी देहाती मेले जैसा दृश्य है। ये किराये पर ला सकने वाले लोग नहीं हैं! शीतल पी सिंह की आँखों देखी।
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