दुनिया की अर्थव्यवस्था एक लंबी मंदी की शिकार है। उबरने के जो रास्ते अपनाए गए उन्होंने ग़रीबी और अमीरी की खाई को ख़तरनाक मुकाम तक पहुँचा दिया। राजनैतिक नतीजा यह निकला कि झूठे भरोसे देकर पनपे, तानाशाही लादने को तत्पर और लोकतंत्र को धता बताने वाले नेताओं का उभार होता नज़र आ रहा है। रिटायर्ड आईएएस राजू शर्मा से यही सवाल पूछ रहे हैं शीतल पी सिंह।
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