दिल्ली दंगे के बीच रिपोर्ट आई है कि आख़िरी तिमाही में विकास दर 4.71 फ़ीसदी ही है। जीडीपी वृद्धि दर आख़िर इतनी कम क्यों है? तो क्या सरकार की आर्थिक नाकामी को छुपाने की कोशिश की जा रही है? आख़िर आँकड़ों से छेड़छाड़ की ख़बरें क्यों आई थीं?
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













.jpg&w=3840&q=75)










