हालाँकि मीडिया ने लॉकडाउन फ़ेल करने का हर गुनाह तब्लीग़ी जमात पर मढ़ दिया है पर असल गुनहगार देश में लॉकडाउन तय करने का तौर तरीक़ा है। मोदीजी जब-जब बड़े ऐलान करते हैं तब तब भीड़ क़ाबू से बाहर हो जाती है और सारे बंधन टूट जाते हैं । इस बार भी ऐसा ही क्यों हुआ? सवाल उठा रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।

























