ये एक स्कैम इन मेकिंग का पर्दाफ़ाश है जिसे सत्यहिंदी और द हिंदू ग्रुप की पत्रिका फ़्रंट लाइन ने मिल जुलकर सामने रक्खा है । दवाओं के रा मैटेरियल (API) को देश में बनाने के लिये केंद्र सरकार द्वारा घोषित चौदह हज़ार करोड़ की प्रस्तावित योजना गटकने के प्रयास का समय रहते भंडाफोड़ करते शीतल पी सिंह
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।





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