विभूति नारायण राय हिंदी के ख्यात लेखक हैं। तमाम कहानियाँ, उपन्यास और लेख उन्होंने लिखे हैं। वह उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अफ़सर रहे और हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति भी रहे। जब गुजरात में दंगे हुए थे तब उन्होंने आईपीएस कैडर के अफ़सरों को पत्र लिखकर संविधान का पालन करने की अपील की थी। जेएनयू के मसले पर उनसे सवाल कर रहे हैं शीतल पी सिंह।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।

























