जेएनयू हिंसा पर तथ्यों की पड़ताल में अब जो मामले सामने आ रहे हैं, वह क्या इशारा करते हैं? एबीवीपी पर जो ऊँगली उठाई जा रही है, वह कितना सच है? हिंसा के लिए ज़िम्मेदार कौन? छात्रों को चुन-चुन कर विशेष तौर पर हमला क्यों किया गया? देखिए शीतल के सवाल में वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष के साथ चर्चा।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।

























