फ़ेथ बनाम एविडेंस यानी विश्वास बनाम सबूत का मुद्दा कोरोना के मामले में बहुत अहम है। विकसित दुनिया सबूत पर आधारित ज्ञान पर चलती है और अविकसित दुनिया को विश्वास के नाम पर धोखे में रखा जाता है। नेता धार्मिक नेता और सामाजिक अगुआ उसकी ज्ञान प्राप्त करने की विवशता को झूठ बोलकर छलते रहते हैं, मिलिये वैज्ञानिकों से और शीतल पी सिंह के साथ जानिए सच।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।








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