क्या मीडिया कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की एक अपराधी द्वारा की गई हत्या के मामले में उन पिछली घटनाओं से कुछ अलग व्यवहार कर रहा है जिनमें पुलिसकर्मियों की जान गई थी । २०१३ में डीएसपी जिया उल हक़ की हत्या के मामले में राजा भैया नामके मंत्री का मंत्रीपद ले लिया गया था और सीबीआई ने जाँच की थी । मीडिया ने तब की सरकार के कपड़े फाड़ डाले थे इस बार वह म्यूट क्यों है ? पूछ रहे हैं शीतल पी सिंह
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।














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